अभिषेक ओझा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर से गणित और संगणना में समेकित निष्णात। न्यूयॉर्क में एक निवेश बैंक में कार्यरत। जिज्ञासु यायावर। गणित, विज्ञान, साहित्य और मानव व्यवहार में रूचि। ब्लॉग:http://uwaach.aojha.in ट्विटर: @aojha

विमुद्रीकरण (Demonetisation) – अंतिम भाग

पहले भाग से आगे …  अभिषेक ओझा विमुद्रीकरण: भ्रष्टाचार, काला धन और जाली नोट को ख़त्म करने के लक्ष्य को लेकर भारत सरकार ने गत आठ नवम्बर की अर्द्धरात्रि से ₹५०० और ₹१००० के नोटों की वैधानिकता समाप्त कर दी। सबसे पहली बात यह कि यह नवीकरण (करेंसी स्वैप)  है, यानि कि पुराने नोट ख़त्म नहीं…

विमुद्रीकरण (Demonetisation) – 1

अभिषेक ओझा  ‘विमुद्रीकरण’ समझने के लिये पहले समझते हैं उन बातों को जिनसे उस पर किये जा रहे विश्लेषण और दिए जाने वाले तर्कों को समझने में आसानी होगी।   अर्थशास्त्र:  अमेरिकी  राष्ट्रपति हेनरी ट्रूमैन ने अर्थशास्त्रियों से परेशान होकर कहा था,”मुझे एक हाथ वाला अर्थशास्त्री चाहिए. जितने अर्थशास्त्री हैं वे कहते हैं ऑन वन हैण्ड… फिर कहते…