अमात्य नियुक्ति : कौटलीय अर्थशास्त्र (विनयाधिकारिक)

कौटल्य इस पर विचार करते हैं कि राजा किसे अमात्य नियुक्त करे। उनके समय अमात्य और मंत्री (अमात्यसंपत) दो भिन्न पद थे और मंत्री का स्थान अधिक ऊँचा था। मंत्री बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण पद था और सामान्यत: एक ही होता था। कौटल्य ने मंत्री के लिये सर्वविद्या गुण सम्पन्न होना अनिवार्य माना है और पुरोहित…

PIE, प्राक् भारोपीय : एक छल

भाषा एक मानव समूह की दूसरे समूह के ऊपर और एक नृजाति के ऊपर दूसरे की श्रेष्ठता या आधिपात्य स्थापित करने और भाषा विज्ञान द्वारा विश्लेषित हो विकृत असत निरूपण हेतु एक उपादान के रूप में प्रयुक्त होती रही है। भाषिक प्रदूषण सांस्कृतिक उपनिवेशवाद से भी जुड़ता है। वर्तमान में हिन्दी सिनेमा का अरबी फारसी…

मनु स्मृति में यात्रा – 4 (वृषली फेन और नि:श्वास)

भाग 1, 2 और 3 से आगे:  __________________________________________ निवेदन है कि इस लेखमाला को पहले भाग से क्रमानुसार ही पढ़ा जाय।  __________________________________________ मनु स्त्री के लिये गुरु के आश्रम में रह कर शिक्षा प्राप्त करने की कोई व्यवस्था नहीं सुझाते हैं। शिक्षा समाप्ति के पश्चात समावर्तन (घर वापसी), भार्या चयन और तत्पश्चात दारकर्म (विवाह उपरांत…

मनु स्मृति में यात्रा – 3 (शूद्र जुगुप्सित)

पहला भाग, दूसरा भाग     … अब आगे ______________________________________ शूद्रों के प्रति पहला कथित निन्दनीय भाव मनुस्मृति के दूसरे अध्याय के 31 वें श्लोक में मिलता है। प्रकरण विभिन्न वर्ण-जातकों के नामकरण से सम्बन्धित है। सातत्य और नैरंतर्य पर विचार के लिये क्र. 30 से 33 तक के श्लोक यहाँ दर्शाये गये हैं। पहले ऋग्वेद की एक…

नक्षत्र परिचय – 2 (ग्रीष्म अयनांत के बहाने)

पहले भाग में हम बता चुके हैं कि लगभग फरवरी से लेकर जुलाई तक का समय नक्षत्र पर्यवेक्षण के लिये उपयुक्त होता है क्यों कि आकाश में बादल नहीं होते, ऋतु भी उपयुक्त होती है, धुन्ध और शीत अनुपस्थित होते हैं। वास्तव में जुलाई का महीना फरवरी की तरह लगभग ही उपयुक्त होता है, कारण…