कहानी सी, नमस्ते

“हर शाम के जैसे मैं अपने ऑफिस में बैठा था। ईश्वर की दया से पिछले कुछ महीने से काम ठीक-ठाक चल रहा था।  सिर खपाई तो पहले जैसी ही थी लेकिन सप्ताह में औसतन एक डील  मैच्योर भी हो रही थी। मकान खरीदने और बेचने वालों से इतना कमीशन आ जाता था कि दाल-रोटी अच्छे…