बुद्धिमत्ता का विज्ञान

मानव उद्विकास को जैव विकास के इतिहास की तरह समझें तो हम देखेंगे कि मानवों में बुद्धि और भाषा का विकास लगभग साथ साथ हुआ। यह स्थिति इतनी साम्य लिए हुए है कि कभी लगता है कि बुद्धि भाषा की प्रतिबिंब है या भाषा बुद्धि की। उदाहरण के लिये मानव-सम (Primates) और शिशुमार (Dolphin) जैसे…

ऋतुगीत : झूम उठते प्राण मेरे

ऋतुगीत : झूम उठते प्राण मेरे त्रिलोचन नाथ तिवारी मुग्ध हो कोमल स्वरों में, मैं बजाता बांसुरी, और, थिरक उठते चरण तेरे, झूम उठते प्राण मेरे॥ तुम हमारी तूलिका और मैं तेरा भावुक चितेरा, भावनाओं में तुम्हारी, रंग भरते प्राण मेरे॥०॥ नाचती बन मोरनी तूं, थाम कर मेरी उंगलियां। मैं तेरी हर भंगिमा पर, लुटा…

सांख्य दर्शन Ssankhya Darshan

सांख्य दर्शन : सनातन बोध: प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 8

आधुनिक मनोविज्ञान के साथ इन दर्शनों का यहाँ वर्णन करने का लक्ष्य है दोनों में दिखने वाली समानता को समझना। सनातन सिद्धांतों का आधुनिक सिद्धांतों में प्रतिबिंबित होना। ‘थिंकिंग फ़ास्ट एंड स्लो’ आधुनिक समय की सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली पुस्तकों में से एक है। सरल और अद्भुत। पर इसमें वर्णित कई सिद्धांतों की झलक उसी अद्भुत रूप से सांख्य के मनोवैज्ञानिक विश्लेषण में मिलती है।

सांख्य दर्शन : सनातन बोध: प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 7

मनु बृहस्पति से कहते हैं कि मनुष्‍यों द्वारा हिमालय पर्वत का दूसरा पार्श्‍व तथा चन्‍द्रमा का पृष्‍ठ भाग देखा हुआ नहीं है तो भी इसके आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि उनके पार्श्‍व और पृष्‍ठ भाग का अस्तित्‍व ही नहीं है। (२०३।६) यह वार्तालाप पढ़ते हुए कई संज्ञानात्मक पक्षपात सांख्य के मनोविज्ञानिक विश्लेषण की विशेषावस्था लगते हैं। संज्ञानात्मक पक्षपातों के सारे सिद्धांत इस कथन की तरह ही हैं। यह कथन आधुनिक व्यावहारिक मनोविज्ञान के हर पुस्तक की भूमिका है!

संज्ञानात्मक पक्षपात inattentional blindness (सनातन बोध: प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 6)

संज्ञानात्मक पक्षपात inattentional blindness का अध्ययन चेतना की दृष्टिहीनता को बताता है। सभी सनातन ग्रंथों में चैतन्य को सर्वश्रेष्ठ विज्ञान कहा गया है। सनातन बोध : प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 1  , 2, 3, 4 और  5 से आगे  … संज्ञानात्मक पक्षपात संज्ञानात्मक पक्षपातों का अध्ययन इस बात का अध्ययन है कि हम किसी बात…