नर पक्षी ,प्रजनन अवस्था में घोसला बनाते हुए

बया BAYA WEAVER

बया Baya Weaverऔर उसके सुन्दर घोंसले। सर्वप्रिय सोन चिरी में नर कई घोंसले बनाने शुरू करता है पर जो घोंसला मादा को पसन्द आता है उसे ही पूरा किया जाता है।   वैज्ञानिक नाम: Ploceus philippinus हिन्दी नाम: बया, सोन चिरैया (भोजपुरी), सुघारी (गुजराती ), बबुई (बंगाली ), सुग्रह्कर्ता (संस्कृत), टोकोरा, टोकोरा चिरई (असम) चित्र…

अवधी चिरइयाँ : घोंघिल ( Anastomus ositans )

घोंघिल लगभग 76 सेंटीमीटर ऊँचाई का स्थानीय स्थानांतरण करने वाला प्रवासी जलीय पक्षी है। घोंघे और केंकड़े इसके प्रमुख आहार होने के कारण इसे यह नाम मिला है। बन्द करने पर भी चोंच किञ्चित खुली सी रहती है जिसके कारण इसे अङ्ग्रेजी में Openbill कहा जाता है।

अवधी चिरइयाँ : SARUS CRANE सारस

सरहंस, उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी। प्रणय का प्रतीक ये अपना जोड़ा जीवन भर के लिए बनाते हैंi यदि किसी कारण एक की मृत्य हो जाये तो दूसरा वियोग में मर जाता है।

अवधी चिरइयाँ : कैमा (Porphyrio porphyrio)

वैज्ञानिक नाम: Porphyrio porphyrio हिन्दी नाम: कैमा ,खरीम ,कलीम संस्कृत नाम: राजीव अम्बुकुक्कुटी अंग़्रेजी नाम: Western Swamphen, Purple Moorhen, Purple Coot चित्र स्थान और दिनाङ्क: माझा, सरयू नदी का किनारा, अयोध्या, 09/04/2017 छाया चित्रकार (Photographer): आजाद सिंह Kingdom: Animalia Phylum: Chordata Class: Aves Order: Gruiformes Family: Rallidae Genus: Porphyrio Species: Porphyrio Wildlife schedule: IV कैमा…

अवधी चिरइयाँ : करांकुल (Pseudibis papillosa)

लाल-नैप आइबिस लम्बे पैरों वाला एक बड़ा काला पक्षी है जिसकी चोंच लम्बी और नीचे को झुकी हुई, पंख और पूँछ नीले-हरे रंग की चमक के साथ काले जबकि गर्दन और शरीर भूरे रंग के होते हैं। इसके कंधे पर एक सफेद धब्बा और सिर के ऊपर चमकीली लाल त्वचा का एक भाग होता है जिसके कारण ही इसका नाम पड़ा है। इसके विकसित बच्चे भूरे रंग के और प्रारम्भ में नंगे सिर वाले होते हैं।

अवधी चिरइयाँ : धनेश (Ocyceros birostris)

धनेश मादा पेंड़ के छेद में अंदर चली जाती है और अपने मल से प्रारम्भ के 2-3 दिन घोंसले के छेद को बंद करने में लगाती है। इसकी बीट बहुत लिसलिसी होती है जोकि सूख जाने पर मिटटी के ढेले जैसी कठोर हो जाती है। नर घोंसले के छेद को सील कर देता है जिसमें केवल मादा की चोंच निकलने भर का छिद्र रह जाता है जिससे वह उसे भोजन चुगाता रहता है। मादा अपने सारे पंख उखाड़कर घोंसले से बाहर फेंक देती है ताकि भीतर बच्चों के लिये आवश्यकता भर स्थान उपलब्ध हो सके।

अवधी चिरइयाँ : कोयल (Eudynamys scolopaceus)

कोयल सम्पूर्ण भारतवर्ष का स्थाई पक्षी है परन्तु अधिक ऊँचाई वाले पहाड़ों पर नहीं पाया जाता। इसे मैदान के वन उपवन और पेंड़ों के झुरमुट ही अधिक प्रिय हैं। इन्हीं स्थानों पर थोड़ा बहुत स्थान परिवर्तन करता है परन्तु बाहर नहीं जाता। यह घनी अमराइयों और बागों में पेड़ों पर ही रहने वाला पक्षी है और भूमि पर पर नहीं उतरता है। घने पेड़ों के बीच छिपकर ही रहता है जिसके कारण दिखाई भी बहुत कम पड़ता है। यह बरगद, पीपल, पाकड़ और अंजीर के फलों के अतिरिक्त कीट पतंगे खाकर अपना पेट भरता है।