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मूलभूत इलेक्ट्रॉनिकी – भाग ३ पी एन डायोड (BasicElectronics – Part 3, P N Diode Junction)

भाग  , 
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पहले भाग में हमने देखा कि कैसे पदार्थ तीन तरह के होते हैं – कंडक्टर (संवाहक conductor ), इंसुलेटर (विसंवाहक insulator ), एवं सेमि कंडक्टर (अर्ध संवाहक semiconductor ) जो साधारण परिस्थिति में तो इंसुलेटर हैं लेकिन विशेष स्थितियों में बिलकुल कंडक्टर की तरह बर्ताव करते हैं। परिशुद्ध या इंट्रिन्सिक सेमीकन्डक्टर की आणविक संरचना और इलेक्ट्रान व् होल्स का अलग होना भी पढ़ा ।
 
दूसरे भाग में हमने देखा कि कैसे शुद्ध सेमीकन्डक्टर में अशुद्धियां मिला कर “पी” और “एन” प्रकार के अशुद्धिकृत या एक्सट्रिंसिक सेमीकंडक्टर बनते हैं और इनके विद्युत् प्रवाहक कैसे आवेशित हैं (पी  + और एन  – आवेशित)
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अब आगे :

हम जानते हैं कि पी – टाइप अर्ध संवाहक (P type extrinsic semiconductor) में हलके + आवेशित संवाहक (होल्स holes )हैं जो भारी – आवेशित आयन को न्यूट्रल बना रहे हैं।  इस चित्र (१)की तरह :

चित्र १ (A,B) : पी टाइप सेमीकंडक्टर के अलग अलग प्रकटीकरण 

इसके विपरीत एन टाइप अर्धसंवाहक में  (N type extrinsic semiconductor) हलके – आवेशित संवाहक (इलेक्ट्रॉन्स electrons ) हैं जो भारी + आवेशित आयन को न्यूट्रल बना रहे हैं।  इस चित्र (२ )की तरह :

चित्र २ (A,B): एन – टाइप सेमीकंडक्टर के अलग अलग प्रकटीकरण
इन चित्रों से साफ़  दिखता है कि , विद्युत् संवाहक हैं हलके भार वाले – इलेक्ट्रान (एन टाइप में)  या फिर + होल (पी टाइप में) , और ये कवर कर रहे हैं अपने से ठीक विरुद्ध आवेशित भारी आयन को।  जब ये हलके संवाहक दूर चले जाएँगे – तब क्या होगा ? होना क्या है – पीछे रह जाएगा भारी (विरोध) आवेशित आयन जो इतना कि अपने जगह ही फंसा हुआ है, विद्युत बल से चल नहीं सकता।
साधारण स्थिति में कोई भी एक स्ट्रक्चर पूरी तरह न्यूट्रल (तटस्थ या neutral ) है।  लेकिन यदि पी और एन टाइप के दो अलग अलग सेंकण्डक्टर ले कर उन्हें जोड़ा जाए तो क्या होगा ?
भौतिकी में हम पढ़ चुके हैं कि diffusion (डिफ्यूजन) से जहाँ जो चीज़ जहां पर अधिक मात्रा में है वहां से वह उस तरफ भागती है जहाँ वह कम है ,और दोनों तरफ बराबर होने का प्रयास करती है।
अब ऊपर , क्योंकि पी टाइप में सिर्फ हलके होल्स बहुत – बहुत ज्यादा हैं और एन टाइप में बिलकुल ही कम हैं (इससे उलट भी – एन में इलेक्ट्रान ज्यादा हैं और पी में बहुत बहुत कम हैं) इसलिए दोनों तरफ के हलके संवाहक तुरंत दूसरी तरफ कूद भागने लगेंगे ।  पी टाइप की तरफ से + होल एन की तरफ भागेंगे ; और एन की तरफ से इलेक्ट्रान पी की तरफ। जैसे ही इलेक्ट्रान होल से मिलेगा दोनों ही जुड़ कर गायब हो जाएंगे (क्योंकि होल और कुछ नहीं सिर्फ बांड में इलेक्ट्रान की कमी से बना हुआ छिद्र भर है)।
   
(क)                                                     (ख)
                                   चित्र ३ : P-N junction formation पी एन जंक्शन बनने की प्रक्रिया  (क) ‘पी’ प्रकार, (ख) ‘एन’ प्रकार 
३ (सी ) दोनों का जुड़ना
अब क्या हो ? यह diffusion कब तक होगा ? याद कीजिये – ये हल्के  संवाहक अपने से विपरीत आवेशित भारी आयन को कवर कर रहे थे।  अब वे भाग गए हैं / पीछे विपरीत तरह का भारी आयन छूट गया है।  चित्र ४ देखिये
चित्र ४ diffusion आरम्भ और अंत स्थितियां 
 
अब भी सीधे हाथ की तरफ इलेक्ट्रान हैं जो बायीं तरफ जाना  ,और बायीं तरफ के हल्के होल भी दायीं तरफ आना चाहते हैं।  लेकिन उनके बीच में एक depletion region (रिक्तिकरण क्षेत्र) बन गया है जहां भारी आयन हैं जो अपनी अपनी तरफ के हलके भगौड़ों को कस कर बांधे हैं।  सो भगौड़े भाग कर दूसरी तरफ जा नहीं पाएंगे। चित्र ५ देखिये।  depletion region एक विद्युत तनाव पैदा कर रहा है जिससे दोनों तरफ के भगौड़े अपनी ही तरफ बढ़ गए हैं – दूसरी तरफ जाने के लिए उन्हें यह तनाव तोडना होगा।
चित्र ५ : रिक्तीकरण और विद्युत् तनाव क्षेत्र का निर्माण
 
(क्रमश:)  

मूलभूत इलेक्ट्रॉनिकी – भाग २ (BasicElectronics – Part 2 Extrinsic )

भाग १  से आगे: 

(मेरा आग्रह है कि इस शृंखला की कोई पोस्ट सीधे न पढ़ी जाय बल्कि पहले भाग से होते हुये समस्त पूरवर्ती कड़ियों की निरंतरता में पढ़ी जाय।)  

पिछले भाग में हमने परमाणु की संरचना (ग्रुप ४) के पदार्थों में पाये जाने वाले संयोजी बंध और शुद्ध अर्ध संवाहकों पर चर्चा की।  अब देखें कि शुद्ध सिलिकॉन में यदि दूसरे समूह की अशुद्धि मिलाई जाए तो क्या होगा ?
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शुद्ध सिलिकॉन (समूह ४ – बाहरी कक्षा में ४ इलेक्ट्रान)) की संरचना पहले दो चित्रों में है।  शून्य डिग्री केल्विन तापमान पर पहले चित्र की तरह कक्षाओं में घूमते हुए सभी इलेक्ट्रान बंध में हैं जैसा कि पहले चित्र में दिख रहा है, लेकिन तापमान बढ़ने पर ये उछल कूद करने लगते हैं  जैसे हम धूप में आंगन में खड़े रहें तो उछलने लगते हैं। 🙂

कमरे के साधारण  तापमान (करीब ३०० डिग्री केल्विन) पर कुछ इलेक्ट्रान पूरी तरह बाहर कूद आते हैं और पीछे कोटर या रिक्ति (hole)  का प्राकट्य होता है। यहाँ सिलिकॉन है लेकिन जर्मेनियम की रचना भी ऐसी ही समझी जाय।

चित्र १ : शून्य केल्विन तापमान अर्थात परम शून्य पर स्थिति           चित्र २ : साधारण तापमान (लगभग ३०० डिग्री केल्विन या २३ डिग्री 
सेल्सियस अर्थात कमरे के साधारण तापमान) पर स्थिति 

नीचे के तीसरे चित्र में इस शुद्ध चौथे समूह के पदार्थ जर्मेनियम में पाँचवे समूह (ग्रुप ५ अर्थात बाहरी कक्षा में ५ इलेक्ट्रान) की थोड़ी सी अशुद्धि मिलाने पर स्थिति दर्शाई गई है।  अब ग्रुप ५ के हर एक परमाणु पर ५ इलेक्ट्रान होने से ४ तो बंध में भाग ले सकते हैं लेकिन अंतिम एक बंध से बाहर है। यह इसलिए कि  संयोजी बंध  पूरा होने पर भी एक इलेक्ट्रान बाकी है जो बाहर जाने को उद्यत है। (पिछले लेख में हमने देखा था कि स्थायित्व के लिए बाहरी कक्षा में ८ की संख्या चाहिए)

अब यदि थोड़ा भी विद्युत खिंचाव हो तो यह अतिरिक्त ऋणावेशित इलेक्ट्रान धनावेश की ओर दौड़ेगा। इस प्रकार बना अर्द्ध चालक गतिशील ऋणात्मक आवेश (Negative Charge) के कारण  N type अनियमित अर्द्धचालक कहलाता है।

इसके  इसके उलट यदि ग्रुप ३ की अशुद्धि हो तो ? नीचे की संरचना देखिये:

यहाँ पिछली बार से उलट स्थिति है।  एक इलेक्ट्रान कम है इसलिए एक बंध में ८ की जगह ७ ही इलेक्ट्रान हैं। इस कमी को कोटर कहिये जो धनाविष्ट होगा।  जब विद्युत क्षेत्र होगा तो यह कोटर  ऋणावेशित बिन्दु की ओर बढ़ना चाहेगा। कैसे जाए? यह दूसरी ओर के बंध में से एक इलेक्ट्रान को अपनी जगह भरने के लिए खींचने लगेगा।  जैसे ही वह इलेक्ट्रान यहां आयेगा, उसके स्थान पर कोटर बन जाएगा। इस प्रकार कोटर गतिशील हो खिसकता है।
चूँकि इस तरह गतिमान कोटर धनावेशित अर्थात Positively Charged है, इसलिये इस प्रकार बना अर्द्धचालक P -type कहलाता है।

(आगे अगले भाग में)