Category Archives: भारत विद्या

ब्रह्माण्ड से महाकैलास तक की अनन्त यात्रा

कैलास दो बताये गये हैं- भूकैलास तथा महाकैलास। प्रचलित धारणा के विपरीत कुछ विद्वानों का यह मानना है कि भगवान् शिव का निवास परमधाम कैलास चीन में स्थित पर्वत नहीं है। पुराणों के अध्येता चीन स्थित पर्वत को वास्तविक भू-कैलास भी नहीं मानते। काशी के केदारखण्ड में भगवान् गौरीकेदारेश्वर का मन्दिर है। इस मन्दिर में खिचड़ी से निर्मित शिवलिंग के प्रादुर्भाव का उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है। भगवान् गौरी केदारेश्वर की महिमा ‘काशी केदार माहात्म्यम्’ नामक ग्रन्थ में वर्णित है। इस ग्रन्थ के चतुर्थ अध्याय में महाकैलास का वर्णन है:

अनेककोटिब्रह्माण्डाधारभूतमहोदके।
लक्षयोजनविस्तारा स्वर्णभूरिति शुश्रुम॥28॥
उन्नतं परमेशस्य स्थानं तल्लक्षयोजनम्।

महाकैलास इति च स्थानं वेदविदो विदुः॥29॥

चित्र आभार: काशी केदार माहात्म्यम्, श्री काशीकेदारखण्ड आध्यात्मिक संस्था

अर्थात्, अनेक कोटि ब्रह्माण्ड के आधारभूत महोदक में हम लोगों ने सुना है कि लाख योजन विस्तीर्ण स्वर्ण भूमि है। वहीं परमेश्वर का स्थान लाख योजन ऊँचा है, उसी को वेद के ज्ञाता महाकैलास कहते हैं।

यहाँ ‘आधारभूत महोदक’ पर विचार करना आवश्यक है। ग्रन्थ के अनुवादक ने इस जलरूपी महोदक को ‘परफेक्ट फ्लुइड’1 कहा है। फ्लुइड (fluid) अर्थात् वह जो बहे जैसे कि जल अथवा वायु। भौतिक विज्ञान में परफेक्ट फ्लुइड वह तरल होता है जिसमें चिपचिपापन अथवा श्यानता (viscosity) का अभाव हो तथा उसमें ऊष्मा प्रवाहित न हो सके। यह परफेक्ट फ्लुइड धरती के वातावरण में भी हो सकता है और तारों के अन्तःकरण में भी। उन्नीसवीं शताब्दी में जब माईकेल्सन और मोर्ले प्रकाश की गति ज्ञात करने में जुटे थे तब यह माना जाता था कि समूचे अंतरिक्ष की संरचना ईथर नामक अदृश्य द्रव से निर्मित है जिससे होकर गुजरते पृथ्वी आदि ग्रह घर्षण उत्पन्न करते हैं। आइंस्टीन ने गुरुत्वाकर्षण बल को सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत से समझाया और अपने इस सिद्धांत से ब्रह्माण्ड के दिक् काल संरचना की व्याख्या की। इस व्याख्या के लिए ब्रह्माण्ड में व्याप्त एक ऐसे द्रव की आवश्यकता थी जिसका व्यवहार परफेक्ट फ्लुइड जैसा हो। आज ‘टेन्सर एनालिसिस’ तथा ‘डिफरेंशियल ज्यामिति’ के समीकरणों में परफेक्ट फ्लुइड को रखना अनिवार्य तत्व है जिसकी सहायता से आधुनिक ब्रह्माण्ड-विज्ञान (कॉस्मोलॉजी) ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और विस्तार का अध्ययन करता है।

शास्त्रों में यह परफेक्ट फ्लुइड कई रूपों में वर्णित है। शिवपुराण रुद्रसंहिता (प्रथम खण्ड) की कथा के अनुसार जब शिव ने अपने वाम अंग के दसवें अंश पर अमृत मला तो उससे श्रीविष्णु ने जन्म लिया। श्रीविष्णु ने सहस्रों वर्षों तक तप किया तो उनके अंगों से ‘नार’ रूपी दिव्य जल निकला और पूरे आकाश (अंतरिक्ष) में व्याप्त हो गया। श्रीविष्णु ने स्वयं इस जल में स्नान किया तत्पश्चात वे ‘नारायण’ कहलाए। उस समय उन परम पुरुष नारायण के सिवा कोई अन्य प्राकृत वस्तु नहीं थी। नारायण से ही यथासमय सभी तत्व प्रकट हुए। प्रकृति से महत्तत्व प्रकट हुआ तथा महत्तत्व से तीनों गुण। इन गुणों के भेद से ही त्रिविध अहंकार की उत्पत्ति हुई। अहंकार से पाँच तन्मात्राएँ हुईं और उन तन्मात्राओं से पाँच भूत प्रकट हुए।

यह वर्णन आधुनिक कणभौतिकी-ब्रह्माण्ड विज्ञान के सिद्धांत से मेल खाता प्रतीत होता है जिनमें कहा गया है कि ब्रह्माण्ड में सबसे पहले ‘बेरयॉन’ और क्वार्क जैसे कण उत्पन्न हुए जिनसे प्रोटॉन न्यूट्रॉन आदि की उत्पत्ति हुई। त्रिगुण को प्रकृति के तीन मूलभूत आकर्षण का स्वरूप माना जा सकता है जिनके द्वारा पदार्थ के कण एक दूसरे से बंधे होते हैं यथा- गुरुत्वाकर्षण, न्यूक्लिअर आकर्षण तथा विद्युतचुम्बकीय आकर्षण। ब्रह्माण्ड के आदिकाल में एक प्रकार का माइक्रोवेव रेडिएशन भी व्याप्त था जिसके छिटपुट लक्षण आज भी उन्नत उपकरणों द्वारा संसूचित किये जाते हैं।

ऋग्वेद के दसवें मण्डल के 129वें सूक्त के 1 से 7 तक के मन्त्र नासदीय सूक्त कहलाते हैं। नासदीय सूक्त का तीसरा मन्त्र देखें:

तम आसीत् तमसा गूळहमग्रेsप्रकेतं सलिलं सर्वमा इदम्
तुछ्येनाभ्वपिहितं यदासीत् तपसस्तन्महिनाजायतैकम्॥

अर्थात्, सृष्टि से पूर्व प्रलयकाल में अंधकार व्याप्त था, सब कुछ अंधकार से आच्छादित था। अज्ञातावस्था में यह सब जल ही जल था और जो था वह चारों ओर होने वाले सत् असत् भाव से आच्छादित था। सब अविद्या से आच्छादित तम से एकाकार था और वह एक ब्रह्म तप के प्रभाव से हुआ। इस प्रकार वेद भी नार रूपी जल परफेक्ट फ्लुइड की व्याख्या करते हैं।

शिवपुराण और लिंगपुराण में कई जगह कहा गया है कि भगवान् शिव अनेक ब्रह्माण्डों की रचना एवं संहार करते हैं। महाकैलास के महोदक में स्थित होने की पुष्टि शिव अथर्वशीर्ष भी करता है। छठा मन्त्र देखें:

अक्षरात् संजायते कालः, कालाद् व्यापक उच्यते। व्यापको हि भगवान् रुद्रो भोगायमानो यदा शेते रुद्रस्तदा संहार्यते प्रजाः। उच्छ्वसिते तमो भवति तमस आपोsप्स्वङ्गुल्या मथिते मथितं शिशिरे शिशिरं मथ्यमानं फेनं भवति फेनादंडं भवत्यंडाद् ब्रह्मा भवति ब्रह्मणो वायुः वायोरोंकार ॐकारात् सावित्री सावित्र्या गायत्री गायत्र्या लोका भवन्ति॥

अर्थात्, अक्षर से काल उत्पन्न होता है। कालरूप होने से उसको व्यापक कहते हैं। व्यापक तथा भोगायमान रुद्र जब शयन करता है तब प्रजा का संहार होता है। जब वह श्वाससहित होता है तब तम होता है। तम से जल (आपः) होता है। जल में अपनी ऊँगली से मन्थन करने से वह जल शिशिर ऋतु के द्रव (ओस) जैसा हो जाता है। उसका मन्थन करने से फेन होता है। फेन से अंडा होता है। अंडे से ब्रह्मा होता है। ब्रह्मा से वायु, वायु से ॐकार होता है। ॐकार से सावित्री, सावित्री से गायत्री और गायत्री से सब लोक होते हैं।

यहाँ अंडे का अभिप्राय ब्रह्माण्ड समझा जा सकता है। फेन का मन्थन वह कालखण्ड हो सकता है जब बेरयॉन आदि कणों और पदार्थ की उत्पत्ति हुई। भगवान् शिव को काल (समय) का नियन्ता माना गया है। काल अर्थात् सृष्टि का प्रारंभ। शुक्ल यजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी में आया है: नमः पूर्वजाय चापरजाय। अर्थात् समय से पूर्व और पश्चात विद्यमान रहने वाले रुद्र को नमस्कार है। सम्भवतः इसीलिए गन्धर्वराज पुष्पदंत ने भी शिवमहिम्नस्तोत्र के दूसरे श्लोक में ही कह दिया कि हे भगवान् आपकी महिमा का बखान तो वेद (श्रुति) भी नेति-नेति (नहीं नहीं) कहते हुए करते हैं अर्थात् डरते हुए करते हैं। महाकैलास द्वारा ही एक से अनेक ब्रह्माण्डों की रचना की जाती है इसमें कोई संशय नहीं। शिव अथर्वशीर्ष के पाँचवें मन्त्र में आया है:

एषो ह देवः प्रदिशो नु सर्वाः पूर्वो ह जातः स उ गर्भे अंतः। स एव जातः स जनिष्यमाणः सर्वतो मुखः। एको रुद्रो न द्वितीयाय तस्मै य ईमाँल्लोकानीशत ईशनिभिः। प्रत्यङ्जनास्तिष्ठति संचुकोचान्तकाले संसृज्य विश्वा भुवनानि गोप्ता।

अर्थात्, यही देव सब दिशाओं में रहता है। प्रथम जन्म उसी का है, मध्य में तथा अंत में वही विद्यमान है। वही उत्पन्न होता है और होगा। प्रत्येक व्यक्तिभाव में वही व्याप्त हो रहा है। एक रुद्र ही किसी अन्य की अपेक्षा न करते हुए अपनी महाशक्तियों से इस लोक में नियम रखता है। सब उसमें रहते हैं और अंत में सबका संकोच उसी में होता है।

यह विवरण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सिद्धांत बिग बैंग के ठीक उलट ‘बिग क्रंच’ कहे जाने वाले प्रतिपादन की ओर संकेत करता है। पॉल स्टाइनहार्ट और नील टुरोक के सिद्धांत के अनुसार तरंगों के रूप में कई ब्रह्माण्ड विद्यमान हैं और जब भी एक ब्रह्माण्ड की परत दूसरे से स्पर्श होती है तब वहाँ कृष्ण विवर (ब्लैक होल) बन जाता है और यह दूसरे ब्रह्माण्ड तक जाने का मार्ग होता है। यह तभी सम्भव है जब पदार्थ पूर्ण रूप से ऊर्जा में परिवर्तित हो सूक्ष्म क्वॉन्टम अवस्था में गमन करे। इस अवस्था में स्थूल शरीर नहीं केवल ऊर्जा रूपी प्राण होता है।

पुष्पदंत ने शिव को कण रूपी व्यष्टि और ब्रह्माण्ड रूपी समष्टि दोनों प्रकार से प्रणाम किया है: नमः क्षोदिष्ठाय स्मरहर महिष्ठाय च नमः। वेद पुराण आदि आर्ष ग्रन्थों में क्लिष्ट गणितीय समीकरण भले न हों किंतु वह दर्शन अवश्य है जिससे परमार्थ विज्ञान तक पहुँचने का मार्ग प्रशस्त हो। ब्रह्माण्ड के रहस्यों को जानने की यात्रा महाकैलास धाम तक पहुँचने के प्रयास से कम नहीं। ॐ नमः शिवाय।


लेखक: यशार्क पाण्डेय
वाराणसी

ब्लॉग: https://sciencediplomat.wordpress.com

 


1 Perfect fluid अर्थात पूर्ण द्रव – Perfect लैटिन के per और facere से मिला कर बना है जिसका अर्थ होता है पूर्ण करना। perfectus का अर्थ ही completed होता है। Per की पूर्ण से समानता द्रष्टव्य है। द्रव की संगति द्रु से है – द्रु गतौ-भावे अप् जिसका अर्थ प्रवाह और (अश्व की तरह) गति से है। यहाँ dra मूल और draw शब्द को देखने से न्यून प्रतिरोध वाले श्यानहीन गति स्पष्ट होती है। विमानन विद्या में भी आगे बढ़ने के लिये draw शब्द का प्रयोग होता है जब कि ऊपर उठने के लिये lift का।
सम्पादकीय टिप्पणी


Originally available at  
The kailas southern side image file is licensed under the Creative Commons Attribution-Share Alike 3.0 Unported

विलम्ब से किस्त (EMI) भरने पर सिबिल अङ्क (CIBIL Score) पर प्रभाव

CIBIL (सिबिल), Credit Information Bureau (India) Limited,
अब TransUnion CIBIL है। 2016 ई. में कम्पनी का 82% भाग TransUnion CIBIL द्वारा क्रय करने के कारण ऐसा हुआ।

विवेक रस्तोगी

CIBIL (सिबिल) का क्रेडिट स्कोर किसी भी व्यक्ति का वित्तीय स्वास्थ्य बताता है, और साथ ही यह भी बताता है कि यदि किसी व्यक्ति को ऋण दिया जाये तो वह ऋण को चुकाने की क्षमता और इच्छा रखता है या नहीं। बैंक एवं ऋण-दाता वित्तीय संस्थायें इससे व्यक्ति के बारे में यह जाँचती हैं कि उसे ऋण देना भी चाहिये या नहीं, यानि कि विभिन्न क्रेडिट स्कोर के विभिन्न मानदण्डों पर वह व्यक्ति खरा उतरता भी है या नहीं। अपना क्रेडिट स्कोर अच्छा रखने के लिये एक महत्वपूर्ण बिंदु होता है ऋण की EMI (Equated Monthly Installment, समीकृत मासिक किस्त) का समय से भुगतान करना। यदि EMI का भुगतान समय से नहीं किया जाता है तो इसकी बहुत ही अधिक संभावना है कि क्रेडिट स्कोर बुरी तरह से खराब हो जायेगा और बैंक उस व्यक्ति को कोई भी नया ऋण देने से मना कर सकते हैं।

सिबिल (CIBIL) संस्था को भारतीय रिजर्व बैंक की सिद्दिक़ी समिति की अनुशंसा पर 2000 ई. में निगमित किया गया। लगभग हर एक वित्तीय संस्था द्वारा हर व्यक्ति के क्रेडिट अर्थात ऋण के लेन देन को सिबिल के माध्यम से निगरानी में रखा जाता है। सिबिल व्यक्ति और संस्था या कंपनी के हर तरह के ऋण के लेन-देन और स्वास्थ्य को परखती है और उनका क्रेडिट स्कोर तय करती है। इन सबका आँकड़ा एक सूची (Database)  में रखा जाता है जो कि सिबिल के पास होता है।

बैंक या ऋणदाता वित्तीय संस्थान सरलता से किसी भी आवेदक के बारे में ऋण देने के पहले सिबिल की वेब साईट से क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट इन्फर्मेशन रिपोर्ट के जरिये उसका वित्तीय स्वास्थ्य जान सकते हैं। क्रेडिट रिपोर्ट और क्रेडिट इन्फर्मेशन रिपोर्ट निकालना बहुत ही सरल और सुलभ है। क्रेडिट रिपोर्ट से वित्तीय संस्थान देने के पहले ही अपने ऋण को खराब ऋण होने से बचा लेते हैं, साथ ही वे आश्वस्त भी हो जाते हैं कि अच्छे क्रेडिट स्कोर वाला व्यक्ति ऋण भगतान कर देगा। यह भी जान लेना चाहिये कि सिबिल स्वयं से ही किसी भी व्यक्ति या कंपनी या संस्थान का क्रेडिट स्कोर नहीं सुधार या बिगाड़ सकता है किंतु यदि बैंक और वित्तीय संस्थान खराब ट्रांजेक्शन रिपोर्ट सिबिल को भेजते हैं तो क्रेडिट स्कोर खराब हो जाता है। बैंक और वित्तीय संस्थान सारे लेन-देन अपने सॉफ्टवेयर से निकालकर सीधे सिबिल की साईट पर अपलोड कर देते हैं जिससे मानवीय भूल होने की सम्भावना नहीं रहती।

विलम्ब से भुगतान और क्रेडिट स्कोर:

अच्छा क्रेडिट स्कोर रखने के लिये अपनी EMI का आपको समय पर भुगतान तो करना ही होता है, साथ ही ध्यान भी रखना होता है कि जितनी EMI है उतनी ही जमा हो, तो इसके लिये कुछ बातें ध्यान रखनी चाहिये जैसे कि यदि विलम्ब से भुगतान किया जाता है तो आपके क्रेडिट स्कोर का तो नुक्सान होता ही है, साथ ही आपको विलम्ब से जमा करने के शुल्क या पेनल ब्याज का भी भुगतना करना होता है।

विलम्ब से बैंक को हानि भी होती है: यदि आप बैंक को विलम्ब से भुगतान करते हैं तो बैंक को भी उसका नुकसान भुगतना पड़ता है क्योंकि बैंक ने भी यह सोचा हुआ होता है कि आप उनकी EMI चुकायेंगे तो वे कहीं और भुगतान करेंगे। विलम्ब होने पर बैंक आपसे भारी भरकम शुल्क तो लेते ही हैं साथ ही सिबिल को भी बताते हैं कि आपको ऋण देना निरापद नहीं है, आपका लेन-देन का व्यवहार ठीक नहीं है।

कम सिबिल स्कोर को हटाना बहुत कठिन होता है:  जब बैंक या वित्तीय संस्थान सिबिल को आपके खराब लेनदेन के व्यवहार के बारे में बताते हैं तो आपका क्रेडिट स्कोर बहुत ही कम हो जाता है, जो कि यह बताता है कि आपको ऋण देना  जोखिम का काम है और ऋण डूब सकता है। क्रेडिट स्कोर को ठीक करना बहुत सरल नहीं होता और ठीक करने में बहुत समय लगता है। जब आप समय पर सुचारु ढंग से अपनी EMI का भुगतान करते हैं, तो क्रेडिट स्कोर ठीक होता है। इसके लिये आप कोई छोटा सा ऋण ले लें और समय पर उसको जमा करते रहें।

एक खराब ट्रांजेक्शन क्रेडिट स्कोर को खराब करने के लिये काफी है: यदि आप वर्षों से सही समय पर सारे ऋण की EMI का भुगतान करते आ रहे हैं और क्रेडिट कार्ड का बिल समय से भरते आ रहे हैं तो भी एक बार भी यदि भुगतान करने में चूक हो गई तो वह क्रेडिट स्कोर को खराब करने के लिये काफी है।

आपको अधिक शुल्क भी चुकाने पड़ते हैं:  विलम्ब से भुगतान के लिये आपका क्रेडिट स्कोर तो खराब होता ही है, यह आपकी जेब पर भी भारी पड़ता है और आपको अधिक शुल्क चुकाने पड़ते हैं। यदि क्रेडिट कार्ड का भुगतान विलम्ब से करते हैं तो बहुत अधिक दण्ड (पैनल्टी) है, ब्याज तो बहुत अधिक होता ही है!

लगभग सभी तरह के ऋण की क्रेडिट हिस्ट्री सिबिल से लिंक हैं भले वे व्यक्तिगत ऋण, गृह ऋण, कार ऋण या स्कूटर ऋण कुछ भी हों। गृह ऋण एक ऐसा ऋण है जो अपना घर बनाने के लिये लगभग हर व्यक्ति लेना चाहता है। गृह ऋण लेने के लिये आपको अपनी क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी रखनी ही होगी, जिससे कि क्रेडिट स्कोर अच्छा बना रहे और आपको गृह ऋण मिल जाये।

ऋणी के रूप में आपको क्या जानना चाहिये:

सबसे पहले तो आपको पता होना चाहिये कि किसी भी प्रकार के ऋण में, पर्सनल लोन हो या क्रेडिट कार्ड, विलम्ब से भुगतान और बकाया राशि न भरना सीधे आपके क्रेडिट स्कोर पर प्रभाव डालता है। यदि आपने कोई ऋण लिया है या आपके पास क्रेडिट कार्ड है तो क्रेडिट कार्ड का भुगतान तय आखिरी तारीख से पहले कर दें या ऋण है तो ऋण की EMI तय समय से भुगतान कर दें।

यदि आपका क्रेडिट कार्ड का बिल बाकी है और उसे आप आगे जारी नहीं रखना चाहते हैं तो जानबूझ कर विलम्ब कर कमी बेसी ‘सैटल’ करने के स्थान पर पूरा पैसा भरिये और बंद करवाइये। आप अपने किसी भी ऋण की किश्त यदि विलम्ब से भरते हैं तो भी बैंक या वित्तीय संस्था आपके इस व्यवहार को सिबिल में दी जाने वाली लेन-देन रिपोर्ट के रूप में सम्मिलित कर देते हैं।

अपनी जानकारी अद्यतन (Up-to-date) रखें:

जब हम ऋण लेते हैं या क्रेडिट कार्ड लेते हैं तो बहुत सी जानकारी समय समय पर हमें बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी को बदलने पर दे देनी चाहिये, जैसे कि घर का पता, फोन नंबर या ईमेल आई.डी., जिससे आपके पास जब भी बैंक ऋण भुगतान संबंधी सूचना भेजना चाहें या क्रेडिट कार्ड कंपनी सूचना भेजना चाहें तो वह आपको समय पर मिल जाये। किसी भी तरह की असुविधा से बचने के लिये हमेशा अपनी सारी जानकारी बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी के साथ अद्यतन रखें।

स्वत: भुगतना (ऑटो डेबिट) सुविधा का लाभ उठायें:

यदि आपका वेतन खाता ऋण देने वाले बैंक में ही है तो आप उनको स्थायी अनुदेश (स्टैंडिंग इन्स्ट्रक्शन) दे दीजिये कि भुगतान की तिथि को आप बकाया भुगतान ऋण खाते में या क्रेडिट कार्ड खाते में जमा कर दें। यदि किसी और बैंक के खाते में भी है तो आप अपने ऋण के लिये ECS (Electronic Clearing Service) के द्वारा भुगतान करने का विकल्प चुनिये। यह खासकर आपके लिये तब बहुत ही उपयोगी है जब आपके पास हर माह भुगतान के लिये समय न हो। इससे आप भुगतान की चिंता से मुक्ति पायेंगे और खुद ही भुगतान हो जायेगा। बस आपको यह सुनिश्चित करना है कि आपके बचत खाते में उतनी मुद्रा रहे।

यदि अधिक कार्ड रखते हैं तो सभी क्रेडिट कार्डों का उपयोग करें, इससे एक तो आप सभी क्रेडिट कार्डों का उपयोग कर रहे होते हैं और साथ ही सभी क्रेडिट कार्डों की अधिकतम सीमा का लाभ भी उठा रहे होते हैं। इससे एक लाभ और है कि सभी कार्डों की भुगतान तिथि अलग अलग होने पर आपको अतिरिक्त अवधि मिल जाती है और समस्त भुगतान एकसाथ नहीं करना पड़ता।

अपनी देयराशि की EMI बनवा लें:

यदि आपको लगता है कि आप अपने क्रेडिट कार्ड की देय राशि पूरी जमा नहीं कर पायेंगे, तो बेहतर है कि बड़े खर्चों की आप EMI करवा लें, और बाकी का पैसा भर दें। यदि वह भी नहीं भर पा रहे हैं तो आप क्रेडिट कार्ड कंपनी से बात करके पूरी देयराशि की EMI करवा लें, EMI आपको सस्ती पड़ेगी। यदि आप क्रेडिट कार्ड की राशि समय पर या उससे पहले नहीं चुकायेंगे तो आपको अधिक ब्याज और शुल्क तो भरना ही होगा, साथ ही क्रेडिट स्कोर पर भी सीधा प्रभाव पड़ेगा।

यदि चेक या बिल पे से भुगतान कर रहे हैं तो थोड़ा पहले कर दें:

यदि आप अपने ऋण या क्रेडिट कार्ड का भुगतान चेक या बिल पे से कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि इन दोनों में ही 3 दिन का समय लगता है। बैंक द्वारा पूर्ण प्रक्रिया में लगने वाला समय लगभग 3 दिन का होता है, तो 3 दिन पहले ही आप अपने भुगतान इस माध्यम से कर दें। पहले NEFT से भुगतान में भी बैंक 3 दिन का समय लेते थे, परंतु आजकल अधिकतर बैंक उसी दिन भुगतान आपके खाते में अपडेट कर देते हैं।

भले मित्रों से उधार लें, पर वित्तीय संस्था के ऋण का समय से भुगतान करें:

यदि भुगतान तारीख पास ही है, और कहीं से भी मुद्रा की व्यवस्था नहीं हो पा रही है, तो अपने मित्रों या निकट सम्बन्धियों से बातकर उनसे थोड़े दिनों के लिये उधार ले लें और बैंक या क्रेडिट क्रार्ड कंपनी को भुगतान कर दें। भुगतान की अंतिम तिथि सर्वदा ध्यान में रखें नहीं तो चूक का सीधा प्रभाव आपके CIBIL क्रेडिट स्कोर पर पड़ेगा।