अरस्तू की 'एथिका निकोमेकिया' का अंश

अंतर्राष्ट्रीय राजनैतिक अर्थव्यवस्था: भाग – 1

एक समय में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संधियाँ वणिकराष्ट्रवाद के यथार्थवादी सिद्धांत पर की जाती थीं जिसके अनुसार कोई देश किसी अंतर्राष्ट्रीय संस्था के नियमों को न मानकर वही निर्णय लेता था जो उसके हित में हो।

विमुद्रीकरण (Demonetisation) – अंतिम भाग

पहले भाग से आगे …  अभिषेक ओझा विमुद्रीकरण: भ्रष्टाचार, काला धन और जाली नोट को ख़त्म करने के लक्ष्य को लेकर भारत सरकार ने गत आठ नवम्बर की अर्द्धरात्रि से ₹५०० और ₹१००० के नोटों की वैधानिकता समाप्त कर दी। सबसे पहली बात यह कि यह नवीकरण (करेंसी स्वैप)  है, यानि कि पुराने नोट ख़त्म नहीं…