मनु स्मृति में यात्रा – 3 (शूद्र जुगुप्सित)

पहला भाग, दूसरा भाग     … अब आगे ______________________________________ शूद्रों के प्रति पहला कथित निन्दनीय भाव मनुस्मृति के दूसरे अध्याय के 31 वें श्लोक में मिलता है। प्रकरण विभिन्न वर्ण-जातकों के नामकरण से सम्बन्धित है। सातत्य और नैरंतर्य पर विचार के लिये क्र. 30 से 33 तक के श्लोक यहाँ दर्शाये गये हैं। पहले ऋग्वेद की एक…

ज.ने.वि. का अंत:पुर – 1

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुल 14 संस्थान हैं जिन्हें School कहा जाता है। इन संस्थानों के भीतर एकाधिक केन्द्र हैं। प्रारम्भ करते हैं ‘भारतीय भाषा केन्द्र’ से। इस केन्द्र की निम्न विशेषतायें हैं: (1) इस केन्द्र में कुल छ: आचार्य हैं।   (2) 2010-11 से 2014-15 के बीच पाँच वर्षों में यहाँ के आचार्यों ने…

मनु संहिता (मनु स्मृति) में यात्रा – 2: थोड़ा सा इतिहास

भाग -1 से आगे… जेठ आषाढ़ का सन्धिकाल है। नीम की छाँव में रह रह आती प्रिय पवन को दुपहर की तपन से मिला कर उसे पीता सा एक युवक स्तब्ध आकाश निहार रहा है। उसके कानों में अभी अभी पढ़ी गयी पुस्तक के अश्वों के टाप की गूँज है और सामने चमकती कठभठ्ठा भूमा…

रामजन्म, सहस्रो वर्ष और चार कवि

श्रीराम जन्म का वर्णन वाल्मीकि से प्रारम्भ हो मराठी भावगीत तक आते आते आह्लाद और भक्ति से पूरित होता चला गया है। भगवान वाल्मीकि बालकाण्ड में संयत संस्कृत वर्णन करते हैं: कौसल्या शुशुभे तेन पुत्रेण अमित तेजसा | यथा वरेण देवानाम् अदितिः वज्र पाणिना || १-१८-१२ जगुः कलम् च गंधर्वा ननृतुः च अप्सरो गणाः |…

मनु संहिता (मनु स्मृति) में यात्रा – 1

प्लासी में इसाई मलेच्छों की विजय से २५० वर्षों पश्चात हुये पामुलपर्ति वेंकट नरसिम्हराव। पी वी और पृथ्वीराज चौहान के बीच ८०० वर्ष का अंतर था। राय पिथोरा से लगभग ५२५ वर्ष पहले हर्षवर्द्धन हुये। उनसे तीन सौ वर्ष पहले चन्द्रगुप्त और चन्द्र से पौने चार सौ वर्ष पहले विक्रमादित्य। विक्रमादित्य से लगभग दो सौ…