आणविक जैविकी, DNA डी.एन.ए. एवं ऋग्वेद से अनुमान

कुछ भारतीय शास्त्रज्ञों जैसे कि डॉ. चन्द्रशेखर त्रिवेदी आदि का मानना है कि ऋग्वेद में वर्णित त्वष्टा, विवस्वत या विश्वरूप वास्तव में डी.एन.ए. ही हैं। कुछ का मानना है कि जल के आयनीकरण से धनावेशित प्रोटान और ऋणावेशित हाइड्राक्सिल आयन के बनने की चर्चा ऋग्वेद में है:

देवानाम्.माने.प्रथमा.अतिष्ठन्.कृन्तत्राद्.एषाम्.उपरा.उदायन्।
त्रयस्.तपन्ति.पृथिवीम्.अनूपा.द्वा.बृबूकम्.वहतः.पुरीषम्॥ (10.27.23)

सम्वत्सर और पञ्चाङ्ग – 1

ऋत को जीवन में उतारने को उद्यत कवि की ऋचा ने एक विराट रूपक का आकार ले लिया जिसमें सात सवारियाँ थीं, सप्त नाम का अश्व जिसे खींचता, रथ ऐसा था कि उसमें बस एक चक्का था जब कि तीन धुरियाँ थीं। वह चक्का न ढीला पड़ता और न नष्ट होता जब कि रथ में विश्व भुवन स्थित थे!