अमात्य नियुक्ति : कौटलीय अर्थशास्त्र (विनयाधिकारिक)

कौटल्य इस पर विचार करते हैं कि राजा किसे अमात्य नियुक्त करे। उनके समय अमात्य और मंत्री (अमात्यसंपत) दो भिन्न पद थे और मंत्री का स्थान अधिक ऊँचा था। मंत्री बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण पद था और सामान्यत: एक ही होता था। कौटल्य ने मंत्री के लिये सर्वविद्या गुण सम्पन्न होना अनिवार्य माना है और पुरोहित…

मनु स्मृति में यात्रा – 4 (वृषली फेन और नि:श्वास)

भाग 1, 2 और 3 से आगे:  __________________________________________ निवेदन है कि इस लेखमाला को पहले भाग से क्रमानुसार ही पढ़ा जाय।  __________________________________________ मनु स्त्री के लिये गुरु के आश्रम में रह कर शिक्षा प्राप्त करने की कोई व्यवस्था नहीं सुझाते हैं। शिक्षा समाप्ति के पश्चात समावर्तन (घर वापसी), भार्या चयन और तत्पश्चात दारकर्म (विवाह उपरांत…