सुख, विभेदकारी बुद्धि एवंं उपद्रष्टा आत्मरूप : सनातन बोध – 15

हमारा नित्य आत्मरूप (true self) है क्या? अनुभूति और स्मृति आत्मरूप तो नहीं? और यदि ये अनुभूति और स्मृति आत्मरूप हमारे गुणसूत्रों में ही अंतर्निहित हैं तो इससे केवल यह पता चलता है कि हमारे गुणसूत्र भी हमारे नित्य आत्मरूप नहीं है, हमारा वास्तविक आत्मरूप इससे परे है एवं इस संज्ञानात्मक पक्षपात से बचने के लिये हमें उस वास्तविक स्वरूप का चिंतन करना चाहिए। श्वेताश्वतरोपनिषद, मुण्डकोपनिषद तथा कठोपनिषद में वर्णित दो पक्षियों की उपमा वाला यह दर्शन  मूलत: ऋषि दीर्घतमा औचथ्य द्वारा दर्शित ऋग्वेद की ऋचा (1.164.20) का यथारूप है।

आदिकाव्य रामायण से – 20 : सुंदरकाण्ड, [न हि मे परदाराणां दृष्टिर्विषयवर्तिनी]

आदिकाव्य रामायण – 19 से आगे …  आगे बढ़ते हनुमान जी को पानभूमि में क्लांत स्त्रियाँ दिखीं, कोई नृत्य से, कोई क्रीड़ा से, कोई गायन से ही क्लांत दिख रही थी। मद्यपान के प्रभाव में मुरज, मृदङ्ग आदि वाद्य यंत्रों का आश्रय ले चोली कसे पड़ी हुई थीं – चेलिकासु च संस्थिता:। रूप कैसे सँवारा…

हुदहुद Upupa epops (खटोला, नवाह, नउनिया) : अवधी चिरइयाँ

  वैज्ञानिक नाम: Upupa epops हिन्दी नाम: हुदहुद, खटोला, नवाह, नउनिया (भोजपुरी) संस्कृत नाम: पुत्रप्रिय अंग्रेजी नाम: Common Hoopoe / Eurasian Hoopoe चित्र स्थान और दिनाङ्क: सरयू नदी के पास माझा अयोध्या, फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश। 28/08/2017 छाया चित्रकार (Photographer): आजाद सिंह Kingdom: Animalia Phylum: Chordata Class: Aves Order: Bucerotiformes Family: Upupidae Genus: Upupa Species: epops Category:…

आदिकाव्य रामायण से – 19 : सुंदरकाण्ड, [चुचुम्ब पुच्छं ननन्द चिक्रीड जगौ जगाम]

आदिकाव्य रामायण – 18 से आगे …  रावण वैसा ही लग रहा था जैसे स्वच्छ स्थान पर ऊड़द का ढेर पड़ा हो, जैसे गङ्गा की धारा में कुञ्जर अर्थात हाथी सोया हो, माष राशिप्रतीकाशम् नि:श्वसन्तम् भुजङ्गवत्। गाङ्गे महति तोयान्ते प्रसुप्तमिव कुञ्जरम्॥  चहुँओर जलते स्वर्णदीपकों से रावण के सर्वाङ्ग वैसे ही प्रकाशित थे जैसे बिजलियों से…

प्रतिभूति (शेयर) बाजार में व्यापार (ट्रेडिंग) share market trading

बाजार के एक मित्र से बात हो रही थी कि कई लोग शेयर बाजार को गाली देते हैं और कहते हैं कि यह बाजार सही नहीं है, न निवेश के लिये, न ही कमाने के लिये और शेयर बाजार केवल जुआ या सट्टाबाजार जैसा ही है, और इससे अधिक कुछ और नहीं। सही बताऊँ तो…