शर्वरी लोरी : वैदिक साहित्य की एक बरसाती पूर्णिमा

शर्वरी लोरी : वर्षा ऋतु का चन्द्र वृषभ है। समुद्र का किनारा है, पूर्णिमा है और चन्द्र निकल आया है। स्वच्छ आकाश में तारक गण हैं और बरसती चाँदनी भी है।

सनातन बोध: प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 5

दुःख-सुख का उल्टा नहीं। उपलब्ध विकल्पों में हम उनको चुनते हैं जिसमें लाभ भले कम हो पर हानि होने के आसार ना हो। हम लाभ से ज्यादा हानि के प्रति सचेत होते हैं। (decision making economics behavioural science) सनातन बोध : प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 1  , 2, 3 और  4 से आगे  … व्यावहारिक…

उपनयन संस्कार

उपनयन की पद्धतियों के ४ भाग दीखते है। विद्यारम्भ, वेदारम्भ, ब्रह्मचर्य व्रत, उपनयन। (१) विद्यारम्भ इसका एक लौकिक रूप है- खली छुआना। खली से स्लेट पर लिखते हैं। सबसे पहले वर्णमाला सीखते हैं। देवों का चिह्न रूप में नगर देवनागरी लिपि है। इसमें ३३ देवों के चिह्न क से ह तक स्पर्श वर्ण हैं। १६ स्वर मिलाने…

अवधी चिरइयाँ : SARUS CRANE सारस

सरहंस, उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी। प्रणय का प्रतीक ये अपना जोड़ा जीवन भर के लिए बनाते हैंi यदि किसी कारण एक की मृत्य हो जाये तो दूसरा वियोग में मर जाता है।