राष्ट्र की ‘शक्ति’ पूजा : मौलिक कल्पना

यशार्क पाण्डेय आधुनिक भारत के सामरिक चिंतन में सन् 1947, ’62, ’71 और 1998 सबसे महत्वपूर्ण हैं। इनमें से तीन वर्ष सैन्यबल के जय-पराजय को रेखांकित करते हैं जबकि 1998 राष्ट्रीय शक्ति की परिकल्पना का परिचायक है। भारत की रक्षा प्रणाली के उच्च प्रबंधन में अत्यावश्यक सुधार सन् 1971 के उपरांत नहीं किये गए हैं।…

वैदिक साहित्य – 1

चेतना के स्तर अनुसार वेदों के मंत्र अपने कई अर्थ खोलते हैं। कतिपय विद्वानों की मान्यता है कि किसी श्रुति के छ: तक अर्थ भी किये जा सकते हैं – सोम चन्द्र भी है, वनस्पति भी है, सहस्रार से झरता प्रवाह भी। वेदों के कुछ  मंत्र अतीव साहित्यिकता लिये हुये हैं। इस शृंखला में हम…

सनातन बोध : प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 2

बुद्ध द्वारा प्रस्तावित निवारण की विधियाँ मस्तिष्क की इस क्रमिक विकास से हुई परिणति से विपरीत उसे उलटी गति में ले जाकर सत्य का आभास कराती हैं। विकासवादी मनोविज्ञान और इस सनातन दर्शन में क्या एक ही बात नहीं है?

स्वास्थ्य बीमा सुवाह्यता (Health Insurance Portability)

वर्ष 2011 में भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) ने भारत में लगभग हर प्रकार के बीमे पर यह सुविधा उपलब्ध करवा दी कि यदि कोई अपनी वर्तमान बीमा कंपनी से संतुष्ट नहीं है तो वह वर्तमान बीमा कंपनी से अपना बीमा नयी कंपनी में ले जा सकता है अर्थात पोर्ट करवा सकता है।