राजदरी-देवदरी : कहि न जाय का कहिये

विन्ध्याचल निवासिनी गिरीन्द्रनन्दिनी ने स्वकीया परिभ्रमण लीला में विचरण करते हुए इस जल प्रपात में समोद मज्जन किया था। राज राजेश्वरी के अवगाहन तथा सर्वदेवशरीरजा की जल लीला-विहार के चलते इस पावन प्रपात का नाम राजदरी-देवदरी हो गया। इस स्थली को देख सर्वसत्वमयी जयन्ती चमत्कृता हो गयीं थीं अतः पार्श्वभूमि का नाम आज भी चमत्कृता (चकिया) नाम से विश्रुत है।

अरण्यानी देवता – ऋग्वेद Araṇyānī Devatā – Ṛgveda 10.146

गिरा दिया वृक्ष किसी ने हाँक पार रहा कोई गैया
उतरी साँझ में वनबटोही समझ रहा चीख किसी की!
वनदेवी कभी न हनती जब तक न आये अरि हत्यातुर
खा कर सुगन्धित इच्छित फल जन लेते विश्राम ठहर।

सांख्य दर्शन Ssankhya Darshan

सांख्य दर्शन : सनातन बोध: प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 8

आधुनिक मनोविज्ञान के साथ इन दर्शनों का यहाँ वर्णन करने का लक्ष्य है दोनों में दिखने वाली समानता को समझना। सनातन सिद्धांतों का आधुनिक सिद्धांतों में प्रतिबिंबित होना। ‘थिंकिंग फ़ास्ट एंड स्लो’ आधुनिक समय की सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली पुस्तकों में से एक है। सरल और अद्भुत। पर इसमें वर्णित कई सिद्धांतों की झलक उसी अद्भुत रूप से सांख्य के मनोवैज्ञानिक विश्लेषण में मिलती है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा बैंक ग्राहकों की सुरक्षा के लिये नये निर्देश

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक ने इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन फ्रॉड में ग्राहकों की सुरक्षा हेतु बैंकों की जिम्मेदारी बढ़ाते हुए दिशा-निर्देश जारी किया हैं।