Devanagari देवनागरी वर्णमाला की राम राम : सरल संस्कृत – ३

सरल संस्कृत पर कुछ दिनों पूर्व हमने लेखशृङ्खला आरम्भ की थी जिस पर विराम लग गया। हमने सीधे बोलने से आरम्भ किया था। सम्भवत: वर्णमाला से आरम्भ न करने के कारण यह विघ्न आया क्यों कि पहले देव आराधना तो होनी चाहिये थी। देव आराधना का क्या अर्थ है?

Valmikiya Ramayan वाल्मीकीय रामायण -37, सुन्‍दरकाण्ड [कुरुष्व मां हर्षिताम्]

मारुति हनुमान ने सीता के वचन सुने तथा सोचने लगे कि यह तो मेरा नया तिरस्कार हो गया ! कवि ने उनके लिये लक्ष्मीवान् (लक्ष्मी – लक्ष्-इ मुट् च) संज्ञा का भी प्रयोग किया है क्यों कि वे सम्पदा से युक्त थे। सम्पदा क्या थी?

Vishnu Puran विष्णुपुराण [पुराण चर्चा – 1, विष्णु दशावतार तथा बुद्ध – 9]

Vishnu Puran विष्णुपुराण तब अपना रूप प्राप्त कर चुका था जब परशुराम संज्ञा प्रचलित हो गयी थी, तथा राधा से सम्बंधित सम्प्रदाय अभी भविष्य के गर्भ में थे।

Narad Puran नारदपुराण [पुराण चर्चा – 1, विष्णु दशावतार तथा बुद्ध – 7]

विष्णु के नयनों के जल से बिन्दुसर जिसमें स्नान से शङ्कर के हाथ से ब्रह्मा का कपाल छूटा, कपालमोचन तीर्थ बना। विष्णु काशी में बिन्‍दुमाधव नाम से विराजमान हुये

Sanskrit Riddles प्रहेलिका आलाप : Tiny Lamps लघु दीप – 17

प्रहेलिका – गुप्त, च्युत, कूट, आलाप – अन्तर्, बहिर् … आलापों के उत्तर हेतु पौराणिक घटनाओं एवं पर्यायवाचियों का ज्ञान परमावश्यक है।

वाल्मीकीय रामायण से – 35, सुन्‍दरकाण्ड [रामस्य शोकेन समानशोका]

रामस्य शोकेन समानशोका … हे वानर ! जो तुमने यह कहा कि राम का मन अन्य की ओर लगता ही नहीं एवं वे शोकनिमग्न रहते हैं, वह मुझे विषमिश्रित अमृत के समान लगा है ।