मनु स्मृति में यात्रा – 3 (शूद्र जुगुप्सित)

पहला भाग, दूसरा भाग     … अब आगे ______________________________________ शूद्रों के प्रति पहला कथित निन्दनीय भाव मनुस्मृति के दूसरे अध्याय के 31 वें श्लोक में मिलता है। प्रकरण विभिन्न वर्ण-जातकों के नामकरण से सम्बन्धित है। सातत्य और नैरंतर्य पर विचार के लिये क्र. 30 से 33 तक के श्लोक यहाँ दर्शाये गये हैं। पहले ऋग्वेद की एक…

मनु संहिता (मनु स्मृति) में यात्रा – 2: थोड़ा सा इतिहास

भाग -1 से आगे… जेठ आषाढ़ का सन्धिकाल है। नीम की छाँव में रह रह आती प्रिय पवन को दुपहर की तपन से मिला कर उसे पीता सा एक युवक स्तब्ध आकाश निहार रहा है। उसके कानों में अभी अभी पढ़ी गयी पुस्तक के अश्वों के टाप की गूँज है और सामने चमकती कठभठ्ठा भूमा…