आदिकाव्य रामायण से – 23 : सुन्‍दरकाण्ड, [गमनं वा परस्त्रीणां हरणं – रावण का धर्म]

सुन्‍दरकाण्ड : पत्तों के झुरमुट में पुष्पों से ढक से गये हनुमान ने उसे पहचानने का प्रयत्न किया। विचित्र वस्त्राभरणों को धारण किये हुये रावण के कान ऐसे थे जैसे कि खूँटे गाड़ रखे हों! – क्षीबो विचित्राभरणः शङ्कुकर्णो। यह निश्चय कर कि यही रावण है, मारुति जहाँ बैठे थे, वहाँ से कुछ नीचे उतर आये ताकि ठीक से देख सकें।

Blue-Tailed Bee-Eater/बड़ा पतिरिंगा, चित्र सर्वाधिकार: आजाद सिंह, © Ajad Singh, मांझा, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश, May 7, 2017

बड़ा पतिरिंगा Merops philippinus

Blue-Tailed Bee-Eater बड़ा पतिरिंगा। यह जल स्रोतों के पास के मैदानों में पाई जाने वाली चिड़िया है। लम्बी पतली शक्ल। लम्बी नुकीली चोंच और पूछ के लम्बे पंखों के कारण आसानी से पहचान जा सकता है।

आदिकाव्य रामायण से – 22 : सुन्‍दरकाण्ड, [प्रशस्य तु प्रशस्तव्यां सीतां तां]

सुन्‍दरकाण्ड : संदिग्ध अर्थ वाली स्मृति, पतित ऋद्धि, विहत श्रद्धा, भग्न हुई आशा, विघ्न युक्त सिद्धि, कलुषित बुद्धि, मिथ्या कलङ्क से भ्रष्ट हुई कीर्ति। इन दो श्लोकों में कवि ने करुणा परिपाक के साथ ज्यों समस्त आर्य संस्कारों का तापसी पर अभिषेक कर दिया!

Brahmand Vayu Brahma ब्रह्माण्ड, वायु, ब्रह्म पुराण, [पुराण चर्चा -1, (राधा, परशुराम), विष्णु दशावतार तथा बुद्ध – 3]

राम जामदग्नेय को प्रतिहिंसक द्वेषी दर्शाया गया है जिसका विस्तृत विवरण ब्रह्माण्ड पुराण में अन्यत्र कहीं से ला कर जोड़ा गया है। इसकी पूरी सम्भावना है कि उस स्वतंत्र पाठ को विकृत करने के पश्चात जोड़ा गया।

Polluted rivers and रस-रक्त दुष्टि

Death of civilization “If there will be water after our gross disrespect by water usage (by inefficient agriculture, unwanted industry usage, faulty management, deforestation), that water will be sheer poison due to excess use of fertilizers.” What do you expect from a polluted rivulet or river? Foster mother like nurturance? My dear friend, come out of…

Markandeya Vaman Koorma मार्कण्डेय वामन कूर्म [पुराण चर्चा-1, दशावतार व बुद्ध -2]

कलियुग के लक्षणों को गिनाते हुये इस पुराण में शुक्लदंताजिनाख्या, मुण्डा, काषायवासस: पद प्रयुक्त हुये हैं जिन्हें स्पष्टत: बौद्ध मत का परोक्ष उल्लेख कहा जा सकता है:

अट्टशूला जनपदाः शिवशूलाश्चतुष्पथाः  । प्रमदाः केशशूलिन्यो भविष्यन्ति कलौ युगे  ॥
शुक्लदन्ताजिनाख्याश्च मुण्डाः काषायवाससः  । शूद्रा धर्मं चरिष्यन्ति युगान्ते समुपस्थिते  ॥

विशेषज्ञों की भ्रांतियाँ Illusions of pundits : सनातन बोध – 17

Illusions of pundits theory. क्या मनोवैज्ञानिक पक्षपात से परे होते हैं? क्या उनके मस्तिष्क लोगों और स्वयं के वास्तविक स्वरूप को समझ पाते हैं? अध्ययनों में इसके रोचक परिणाम मिले हैं। सनातन बोध : प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 1  , 2, 3, 4 , 5 , 6, 7, 8, 9 , 10, 11,12, 13, 14 , 15 , 16…