यतो धर्मस्ततो जय:

धर्मक्षेत्र। भारत युद्ध में उपदिष्ट भगवद्गीता के चौथे अध्याय के आठवें श्लोक में श्रीकृष्ण वह कहते हैं जिसे राज्य के तीन आदर्शों के रूप में भी लिया जा सकता है: परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय दुष्कृताम् धर्म संस्थापनाय पहला सूत्र उपचारात्मक है, यदि सज्जन पीड़ित है तो उसे पीड़ा से मुक्ति दी जाय, अन्याय को समाप्त किया…

Bank Myna दरिया मैना

हिंदी नाम: गंगा मैना, बराद मैना, चही दरिया मैना, गंग सलिक, गंगा सारिका (संस्कृत) वैज्ञानिक नाम: Acredotheres Ginginianus Kingdom: Animalia Phylum: Chordata Class: Aves Order: Passeriformes Family: Sturnidae Genus: Acedotheres Species: Ginginianus Category: Perching birds Wildlife schedule: IV Population: Increasing Visibility: Common आकार: 18-20 सेमी. प्रवास स्थिति: Resident, निवासी, स्थानीय प्रवास कभी कभी। भोजन: अनाज के दाने, कीड़े-मकोड़े,आदमियों…

कनकधारा स्तोत्र – आदिशङ्कराचार्य की परदु:खकातरता

अद्भुत संकल्पनाओं की आश्चर्यचकित कर देने वाली, पुलक से भर देने वाली, अनुभूतियों से हृदय को झकझोर देनेवाली महानिशा को हम दीपावली कहते हैं, हर वर्ष उस अनमोल ऊर्जा के उत्स आख्यान से आपादमस्तक उत्साह में स्नात, नवोन्मेषशालिनी प्रज्ञा की अंतरगुहा की आह्लाद यात्रा पर निकल पड़ते हैं।   बाह्य स्वरूप में तो केवल दियों, मिठाइयों…

Scaly-Breasted Munia मुनिया

  हिंदी नाम: मुनिया, सीनाबाज, तेलिया मुनिया, बिंदुकित मुनिया English & Alternate Names: Nutmeg Mannikin, SpiceFinch, Spotted Munia वैज्ञानिक नाम: Lanchura Punchulata Kingdom: Animalia Phylum: Chordata Class: Aves Order: Passeriformes Family: Estrildidae Genus: Lanchura Species: Punchulata Category: Perching birds Wildlife schedule: IV Population: Stable आकार: 11 से 12 से.मी. प्रवास स्थिति: निवासी     भोजन:…

आदिकाव्य रामायण से – 18 : सुंदरकाण्ड [विवेकः शक्य आधातुं]

इस सुषमा बीच भी मारुति चैतन्य थे। उन्हें रावण फुफकारते नाग समान लगा – नि:श्वसन्तम् यथा नागम् रावणम्, उद्विग्न और सभीत हो पीछे हट गये। वह वैसा ही लग रहा था जैसे स्वच्छ स्थान पर ऊड़द का ढेर पड़ा हो, जैसे गङ्गा की धारा में कुञ्जर सोया हो, माष राशिप्रतीकाशम् नि:श्वसन्तम् भुजङ्गवत्। गाङ्गे महति तोयान्ते प्रसुप्तमिव कुञ्जरम्॥

आदिकाव्य रामायण से – 17 : सुंदरकाण्ड [मार्गमाणस्तु वैदेहीं सीतामायतलोचनाम्]

आदिकाव्य रामायण से – 16 से आगे … गंध प्रतिमा अनिल द्वारा प्रेरित हो अंत:पुर में हनुमान जी के प्रवेश से पहले वाल्मीकि ने सुंदर प्रयोग किये हैं। उस भवन का विस्तार बताने के लिये ‘आयत’ शब्द का प्रयोग करते हैं, एक योजन लम्बा और आधा योजन चौड़ा – अर्धयोजनविस्तीर्णमायतं योजनं हि तत्! 1:2 का…