नगरीकरण एवं भारत का विकास : जन-कुपोषण एवं खटमल विकास

हम, भारत के लोग, विश्व की कुल कुपोषित जनसंख्या का एक चौथाई अपने में समोये हुये हैं। कुपोषण ग्रामीण, नागर, धनी, निर्धन, मध्यवर्ग इत्यादि सब की वास्तविकता है। खाद्यान्न वितरण के विशाल सरकारी तंत्र पर हमारे सकल घरेलू उत्पादन का एक प्रतिशत व्यय होता है जो कि बहुत बड़ी राशि है तब भी हमारे गोदामों…

मध्यमान प्रत्यावर्तन (reversion to mean) सिद्धान्त : सनातन बोध – 14

सनातन बोध : प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 1  , 2, 3, 4 , 5 , 6, 7, 8, 9 , 10, 11,12, 13 से आगे मध्यमान प्रत्यावर्तन (reversion to mean),  सांख्यिकी, मनोविज्ञान और व्यावहारिक अर्थशास्त्र का एक सहज परन्तु महत्त्वपूर्ण सिद्धांत है। चार्ल्स डार्विन के चचेरे भाई फ़्रैन्सिस गॉल्टॉन को इसके प्रतिपादन का श्रेय दिया जाता…

भारतीय जन और ‘सुरक्षा’

आज भारतीय जन को ‘सुरक्षा’ के प्रति सजग हो समीक्षा एवं कार्रवाई करने की आवश्यकता है। जीवनशैली, मान्यतायें, क्रियाकलाप एवं सबसे अधिक चिंतन पद्धति विषाक्तता से ग्रसित हो चुके हैं। चेतिये! समय की पुकार तीव्र है।

पश्च दृष्टि भ्रम, योजना भ्रांति, आशावादी पक्षपात, आसक्ति : सनातन बोध – 12

सनातन बोध : प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 1  , 2, 3, 4 , 5 , 6, 7, 8, 9 , 10, 11से आगे  पिछली कड़ी में हमने व्यावहारिक अर्थशास्त्र पर सांख्यिकी के प्रभाव को देखा, जिसमें हमने कई विशेषज्ञों के अपने स्वयं के अधूरे ज्ञान से अनभिज्ञ रहने की बात की थी। पश्च दृष्टि भ्रम (hindsight…