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अवधी चिरइयाँ : सफेद गिद्ध (Neophron percnopterus)

वैज्ञानिक नाम: Neophron  percnopterus
स्थानीय नाम:
सफ़ेद गिद्ध, कालकुर्घ, गोबर गिद्ध, मिस्री गिद्ध                                   
अंग़्रेजी नाम: Egyptian Vulture, Indian Scavenger Vulture, White Scavenger Vulture
चित्र स्थान और दिनाङ्क: सोहावल, लखनऊ मार्ग, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश, 23/01/2017
छाया चित्रकार (Photographer): आजाद सिंह

आजाद सिंह

Order: Accipitriformes, Family: Accipitridae

आकर, रूप आदि: लगभग 65 से.मी. आकार का यह गिद्ध, सबसे छोटा गिद्ध होता है। गंदला सफ़ेद रंग का ,पीली चोंच और पीला सिर, अपरिपक्व आयु में भूरे रंग के चील जैसे पर पूँछ पूर्णतः भिन्न होती है।

नर और मादा एक जैसे होते हैं किन्तु प्रजनन के समय नर गिद्ध का रुख अधिक नारंगी रंग का हो जाता है। यह मिस्र के लोगों द्वारा पूजा जाने वाला गिद्ध है क्यों कि यह उनका कचरा और मरे हुए पशुओं की सफाई करता रहता है।

विस्तार; यूरोप, उत्तरी अफ्रीका तथा पूरे भारत में (पूर्वोत्तर भारत को छोड़कर), पाकिस्तान और श्रीलंका में मनुष्यों की बस्ती के निकट।

भोजन: मुख्यतया मरे हुए पशु पर छोटे स्तनपाय जंतु, अंडे, पक्षी और सरिसृप का शिकार भी कर लेते हैं।

प्रजनन का समय: फ़रवरी से अप्रैल तक बड़े वृक्षों या पुराने बड़े भवनों के ऊपर, चट्टानों के कगार आदि पर सूखी टहनियों, बाल जैसी वस्तुओं से घोंसला बनाते हैं और 2 अंडे देते हैं जो सफ़ेद से पीले या ईंट जैसे लाल, ललछौंह, भूरे आदि रंग के होते हैं। नर मादा, दोनों बारी बारी  से अंडे सेने से लेकर बच्चों की देखभाल मिल जुलकर करते हैं।


लेखक: आजाद सिंह
शिक्षा: जंतुविज्ञान परास्नातक,
लखनऊ विश्वविद्यालय
व्यवसाय: औषधि विपणन

अभिरुचि: फोटोग्राफी

अवधी चिरइयाँ : कोटुर (Psilopogon zeylanicus)

आजाद सिंह

वैज्ञानिक नाम: Megalaima zeylanicus or Psilopogon zeylanicus
स्थानीय नाम: कोटुर, बड़ा बसंता (हिन्दी)
अंग़्रेजी नाम: Brown-headed Barbet
चित्र स्थान और दिनाङ्क: नवाबगञ्ज, लखनऊ (उत्तरप्रदेश), 04/01/2017
छाया चित्रकार (Photographer): आजाद सिंह

लक्षण, चरित्र और स्वभाव:
कोटुर भारी चोंच वाले घास के रंग के वृक्षीय पक्षी हैं जिनका आकार लगभग 27 सेंटीमीटर होता है। नर और मादा एक ही जैसे होते हैं।

इनके सिर, गर्दन, ऊपरी पीठ और सीने पर गहरे भूरे रंग के श्वेत धारी वाले पर होते हैं जब कि निचला सीना और पेट हरे रंग के होते हैं। इनकी पूँछ का निचला भाग हल्का नीला होता है और आँखें नारंगी रंग के वलय से घिरी होती हैं जो कि चोंच के मूल का स्पर्श करता है।

फल जैसे आम, पके कटहल, पपीता, केला आदि का आहार करते हैं। कभी कभी कीड़े मकोड़े भी खाते हैं।

ये प्राय: अकेले ही पाये जाते हैं किंतु फल उद्यानों में 20 की संख्या तक के झुण्ड में भी देखे गये हैं। ये शीत ऋतु में लगभग चुप रहते हैं किंतु ग्रीष्म ऋतु में लगातार कुटरू कुटरू की ध्वनि निकालते रहते हैं।

भौगोलिक वितरण‌: इनकी 3 जातियाँ समस्त भारत, बँगलादेश और श्री लंका के नाम और सूखे पर्णपाती वनों और उनके साथ के आवासीय क्षेत्रों में पायी जाती हैं।

प्रजनन: ये भूमि से 2 से 15 मीटर की ऊँचाई तक वृक्ष कोटरों में अण्डे देते हैं जिनकी संख्या प्राय: तीन होती है, यदा कदा दो से चार अण्डे भी देखे गये हैं। ये फ़रवरी से जून तक यह क्रिया सम्पन्न करते हैं। नर तथा मादा दोनों मिलकर अण्डे सेते हैं।

सम्पादकीय नोट:
अवध से बहुत दूर पश्चिमी घाट (अगस्त्यार मलाइ शृंखला) में गाने वाली दो नई प्रजाति की चिड़ियों का पता चला है। सुषमा रेड्डी, वी वी रॉबिन, सी के विष्णुदास, पूजा गुप्ता, उमा रामकृष्णन आदि की टीम ने Sholicola ashambuensis, albiventris और Montecincla meriodionalis की पहचान की। इससे सम्बन्धित आलेख BMC Evolutionary Biology के वर्तमान अङ्क में छपा है।

लेखक: आजाद सिंह
शिक्षा: जंतुविज्ञान परास्नातक,
लखनऊ विश्वविद्यालय
व्यवसाय: औषधि विपणन

अभिरुचि: फोटोग्राफी