पुराणों में क्या है – 1 : विष्णु दशावतार तथा बुद्ध – 2 [मार्कण्डेय, वामन, कूर्म]

कलियुग के लक्षणों को गिनाते हुये इस पुराण में शुक्लदंताजिनाख्या, मुण्डा, काषायवासस: पद प्रयुक्त हुये हैं जिन्हें स्पष्टत: बौद्ध मत का परोक्ष उल्लेख कहा जा सकता है:

अट्टशूला जनपदाः शिवशूलाश्चतुष्पथाः  । प्रमदाः केशशूलिन्यो भविष्यन्ति कलौ युगे  ॥
शुक्लदन्ताजिनाख्याश्च मुण्डाः काषायवाससः  । शूद्रा धर्मं चरिष्यन्ति युगान्ते समुपस्थिते  ॥

पुराणों में क्या है – 1 : विष्णु दशावतार तथा बुद्ध – 1

भूमिका  भारत में पुराण लेखन की बहुत प्राचीन परम्परा रही है जिसकी साखी अथर्वण संहिता1, शतपथ ब्राह्मण2, अर्थशास्त्र3 इत्यादि जैसे स्रोत हैं। पुराण शब्द का अर्थ ‘प्राचीन’ से ले कर ‘श्रुतियों अर्थात त्रयी के पूरक’ तक किया जाता रहा है। पुराणों का समग्र भारतीय जन जीवन पर बहुत प्रभाव रहा और है। पुराण प्राचीन काल…