अरस्तू की 'एथिका निकोमेकिया' का अंश

अंतर्राष्ट्रीय राजनैतिक अर्थव्यवस्था: भाग – 1

एक समय में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संधियाँ वणिकराष्ट्रवाद के यथार्थवादी सिद्धांत पर की जाती थीं जिसके अनुसार कोई देश किसी अंतर्राष्ट्रीय संस्था के नियमों को न मानकर वही निर्णय लेता था जो उसके हित में हो।

जाली मुद्रा (FICN) का अर्थशास्त्र: तंत्र, संकट तथा सामाजिक प्रभाव

लेखक: श्री यशार्क पाण्डेय  __________________ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हजार व पाँच सौ के नोटों के विमुद्रीकरण से सबसे तगड़ा प्रहार जाली मुद्रा तथा आतंक के व्यवसाय पर हुआ है। एक अनुमान के अनुसार बैंक तथा सुरक्षा एजेंसियाँ कुल जाली मुद्रा का केवल 30प्रतिशत ही पकड़ पाती हैं। पाकिस्तानी संस्था आईएसआई (Inter-Services Intelligence)  भारत…