बनारस की गलियाँ : एक चित्रलेख

आप एक सिरे से बनारस की गलियों में गायों, भगवान शंकर के सुस्त वाहन नंदी महाराज से बचते बचाते चले जा रहे हैं तभी अचानक से भीड़ का एक रेला चीखेगा-बच के रेऽऽऽ! पता चला कि नंदी महाराज रौद्र रूप में हैं।

शून्य

१२०२ ई. में फिबोनाची ने ‘लिबेर अबाचि’ अर्थात ‘गणना की पुस्तक’ की रचना की। यह भारतीय अंक पद्धति से यूरोप का पहला परिचय था। फिबोनाची ने इस पुस्तक में मोडस इंडोरम – यानी भारतीय पद्धति का उल्लेख किया।

अवधी चिरइयाँ : कोटुर (Psilopogon zeylanicus)

हरे और भूरे वर्ण के कोटुर (Megalaima zeylanicus or Psilopogon zeylanicus) पक्षी प्राय: अकेले ही पाये जाते हैं किंतु फल उद्यानों में 20 की संख्या तक के झुण्ड में भी देखे गये हैं। ये शीत ऋतु में लगभग चुप रहते हैं किंतु ग्रीष्म ऋतु में लगातार कुटरू कुटरू की ध्वनि निकालते रहते हैं।

आपणी बात : रक्षा, संरक्षण और सुरक्षा

आशा है कि भारत में और वैश्विक स्तर पर भी उभरे रक्षा, सुरक्षा और संरक्षण के स्वर आने वाले वर्षों में इस संकट के उन्मूलन में सफल होंगे और मानव की स्वयं को समृद्ध और सुखी बनाने वाली नवोन्मेषी यात्रा ऐसे ही नये लक्ष्य अर्जित करती रहेगी।