ईशावास्योपनिषद (ईशोपनिषद)

भारतीय दर्शन समन्वयवादी और विश्लेषणात्मक है। उसमें तू-तू मैं-मैं नहीं, हम ही हम है। एक ही ईश्वर का अंश होने के कारण हम सभी एक वैश्विक स्वरूप का अंशमात्र हैं। इसलिये किसी को किसी के आगे झुकाने की आवश्यकता नहीं है।

एञ्जिओ देवि (संस्कृत हास्य)

एञ्जिओ देवि सा बाला ! भवान् जानासि वा ? सा का इति भवान् जानासि वा? सा जानुपर्यन्तं शुद्ध चर्म पादत्राणं धारयति। एषा बाला मुण्डोपरि रे-बेन उपनेत्रं धारयति सर्वदा। विचित्रवर्ण ओष्ठरागः, कज्जलिका, पिष्टि समेता सर्व रूपसज्जायुक्ता सा बाला भवान् न जानासि? वाण्याः आङ्ग्लभाषायां वादिन् एषा बाला तीव्र वेगेन कटु अपशब्दमपि वक्तुं समर्था। एकस्मिन् करे बिसलरि जलकूपी…

व्यस्क पक्षी

अवधी चिरइयाँ : जलमखानी (Metopidius indicus)

जलमखानी थोड़ी लजालु प्रजाति होती है जो आहट मिलते ही घास आदि में छुप जाती है। घास न मिलने पर ये पानी के अन्दर प्रवेश कर जाती हैं

जनसंख्या वृद्धि और चतुर ताँत या अभिज्ञ तंतु

लोक आगामी समस्याओं की अनदेखी करेगा तो तंत्र रोगग्रस्त होगा और पितरों और देवताओं का ताना बाना टूट जायेगा। आँखें खोलिये, जनसंख्या समस्या को सबसे पहले, विमर्श के केन्द्र में लाइये।