आपन बाति: सोच, सङ्कट और उद्योग

पानी की समस्या से जूझते शीत शुष्क मरुस्थल कहे जाने वाले लद्दाख के सोनम वांगचुक के सामने भी यही प्रश्न था। वह आगे बढ़े। बर्फ के ऊँचे टीले बना कर जलदोहन का नव्य सफल प्रयोग कर डाले। उनके बनाये ‘हिमस्तूपों’ और नलिकाओं की साधारण सी संरचना में गुरुत्व बल के चतुर उपयोग से जल ‘उत्पादित’ होता है जिसका प्रयोग सिंचाई के लिये किया जाता है। उस जल की ड्रिप सिंचाई से शस्य लहलहा रही है।  आगे उनकी योजना 30 मीटर ऊँचे बीसों स्तूपों के निर्माण की है।

हिन्दी में अरबी प्रदूषण पर, बँगला इतिहास के बहाने

हिन्दी सिनेमा की भाषा में अरबी प्रदूषण हिन्दीभाषी भारत को जड़ से काटने के लिये किया गयाi हिन्दी का अभिनेता उर्दू के लिए मानद पीएचडी पाए तो चौकन्ना हो जाना चाहिये। बँगला इतिहास के बहाने वर्तमान बँगलादेश (पूर्वी बंगाल) के मैमेनसिंह जनपद की स्थापना 1 मई 1787 को तत्कालीन ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा हुई।…

मनु स्मृति में यात्रा – 4 (वृषली फेन और नि:श्वास)

भाग 1, 2 और 3 से आगे:  __________________________________________ निवेदन है कि इस लेखमाला को पहले भाग से क्रमानुसार ही पढ़ा जाय।  __________________________________________ मनु स्त्री के लिये गुरु के आश्रम में रह कर शिक्षा प्राप्त करने की कोई व्यवस्था नहीं सुझाते हैं। शिक्षा समाप्ति के पश्चात समावर्तन (घर वापसी), भार्या चयन और तत्पश्चात दारकर्म (विवाह उपरांत…

मनु स्मृति में यात्रा – 3 (शूद्र जुगुप्सित)

पहला भाग, दूसरा भाग     … अब आगे ______________________________________ शूद्रों के प्रति पहला कथित निन्दनीय भाव मनुस्मृति के दूसरे अध्याय के 31 वें श्लोक में मिलता है। प्रकरण विभिन्न वर्ण-जातकों के नामकरण से सम्बन्धित है। सातत्य और नैरंतर्य पर विचार के लिये क्र. 30 से 33 तक के श्लोक यहाँ दर्शाये गये हैं। पहले ऋग्वेद की एक…