एकाष्टका देवी ,नववर्ष पर पिया घर आया, मंगल गाओ री! : अथर्ववेद

अष्टका के लिये ‘एकाष्टका’ संज्ञा देते हुये उसे संवत्सर की पत्नी बताया गया है जिसके साथ वह (यह सुहाग की) आरम्भ रात व्यतीत करता है:
एषा वै संव्वत्सरस्य पत्नी यदेकाष्टकैतस्यां वा गतां रात्रिं वसति साक्षादेव तत् संव्वत्सरमारभ्य दीक्षन्ते। (5.9.2)

सांख्य दर्शन : सनातन बोध: प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 7

मनु बृहस्पति से कहते हैं कि मनुष्‍यों द्वारा हिमालय पर्वत का दूसरा पार्श्‍व तथा चन्‍द्रमा का पृष्‍ठ भाग देखा हुआ नहीं है तो भी इसके आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि उनके पार्श्‍व और पृष्‍ठ भाग का अस्तित्‍व ही नहीं है। (२०३।६) यह वार्तालाप पढ़ते हुए कई संज्ञानात्मक पक्षपात सांख्य के मनोविज्ञानिक विश्लेषण की विशेषावस्था लगते हैं। संज्ञानात्मक पक्षपातों के सारे सिद्धांत इस कथन की तरह ही हैं। यह कथन आधुनिक व्यावहारिक मनोविज्ञान के हर पुस्तक की भूमिका है!

श्री भगवान सिंह से बातचीत – 1 : ऋग्वेद

श्री भगवान सिंह ‘मघा’ के इस अंक से हम एक नयी शृंखला आरम्भ कर रहे हैं जिसमें विविध विषयों पर विद्वानों से बातचीत और साक्षात्कार प्रस्तुत किये जायेंगे। श्रीगणेश के लिये भारत की सबसे प्राचीन थाती ‘ऋग्वेद’ से अधिक उपयुक्त कौन सा विषय हो सकता है और ऋग्वेद पर बातचीत के लिये स्वनामधन्य श्री भगवान…

गृह ऋण : भुगतान निर्णय (समय से पहले भरें या नहीं?)

गृह ऋण का समय से पहले भुगतान करने से पहले मूलभूत बात समझें कि यदि आपको उस रकम पर मिलने वाली ब्याज की दर, ऋण के ब्याज दर से अधिक है तो ऋण को चालू रखना ही समझदारी है।

संस्कृते अङ्कानांसंख्यानांच प्रयोगः (गताङ्कतः अग्रे)

त्रि (3) + त्रय(3) + अङ्ग(6) + पञ्च(5) +अग्नि(3) + कु(1) + वेद(4) + वह्नय(3); शर(5) + ईषु(5) + नेत्र(2) + अश्वि(2) + शर(5) + इन्दु(1) + भू(1) + कृताः(4)। वेद(4) + अग्नि(3) + रुद्र(11) + अश्वि(2) + यम(2) + अग्नि(3) + वह्नि(3); अब्धयः(4) + शतं(100) + द्वि(2) + द्वि(2) + रदाः(32) + भ (नक्षत्र) + तारकाः।

हिन्दुत्त्व की अच्छाइयाँ जो इस्लाम और ईसाई मजहबों में नहीं हैं।

हिन्दुत्त्व की अच्छाइयाँ : ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिकी गुप्तचर संस्थायें भारतीय प्रज्ञा को स्वयं भारतीयों से भी अधिक गम्भीरता से अपनाती हैं। Goodness of Hinduism मारिया विर्थ हिन्दुत्त्व में ऐसी कई अच्छाइयाँ हैं जिनका ईसाइयत और इस्लाम में अभाव है, जो कि स्पष्ट भी हैं। यदि कोई ईसाई या मुस्लिम समूचे विश्व में…

शर्वरी लोरी : वैदिक साहित्य की एक बरसाती पूर्णिमा

शर्वरी लोरी : वर्षा ऋतु का चन्द्र वृषभ है। समुद्र का किनारा है, पूर्णिमा है और चन्द्र निकल आया है। स्वच्छ आकाश में तारक गण हैं और बरसती चाँदनी भी है।