शून्य

१२०२ ई. में फिबोनाची ने ‘लिबेर अबाचि’ अर्थात ‘गणना की पुस्तक’ की रचना की। यह भारतीय अंक पद्धति से यूरोप का पहला परिचय था। फिबोनाची ने इस पुस्तक में मोडस इंडोरम – यानी भारतीय पद्धति का उल्लेख किया।

Indian Robin Saxicoloides fulicata भुजइन [जैव विविधता: अवधी चिरइयाँ]

Indian Robin Saxicoloides fulicata भुजइन वैज्ञानिक नाम: Saxicoloides fulicata स्थानीय नाम: भुजइन, कलचुरी, गँड़ुलर, फुदकी चित्र स्थान और दिनाङ्क: अयोध्या (उत्तरप्रदेश), 06/01/2017, चित्र मादा चिड़िया का है। छाया चित्रकार (Photographer): आजाद सिंह लक्षण, चरित्र और स्वभाव: नर काले रंग का, पंख पर सफेद धब्बा और उठी हुई पूँछ, पूँछ की निचले छोर पर जंग जैसा…

चित्र लेख : मल्लाह के बच्चे

बनारस में वैसे तो मल्लाहों की बस्ती वाला ‘निषाद राज घाट’ भी है लेकिन नये बने ‘रविदास घाट’ (असी घाट से आगे) से लेकर वरुणा और गङ्गा के संगम तट पर स्थित ‘आदिकेशव घाट’ तक फैले अस्सी घाटों तक निरंतर बहती हैं नावें और दिखते हैं निषाद जिन्हें हम मल्लाह, केवट, माझी आदि नामों से…

काल गणना में खिसकती मकर संक्रांति

हम जानते हैं कि पृथ्‍वी की मूल रूप से दो गतियाँ होती हैं, अपने अक्ष पर घूर्णन की और सूर्य की परिक्रमा की, परंतु हम पृथ्‍वी की दो और गतियों पर लगातार निर्भर हैं, उनमें से एक है – अक्ष पर घूर्णन करते समय साढ़े तेईस अंश के झुकाव के कारण ऊर्ध्व अक्ष की वृत्तीय…

श्रीनिवास रामानुजन ‘गणितं मूर्धनि स्थितम्’

रामानुजन अपने आप में एक बहुत ही विचित्र, भोले, दृढ़ संकल्पित, कुंठित, हँसमुख और साधारण व्यक्ति थे। आप कह सकते हैं कि मेरे पास विशेषण नहीं हैं इसलिये मैंने विरोधाभासी शब्द लिख दिये हैं। ऐसे व्यक्ति को समझने का प्रयास करना आसान भी नहीं है। इस आलेख में रामानुजन की अतुलनीय मेधा की एक झलक से परिचय कराने का मेरा प्रयास है। श्रीनिवास रामानुजन के रूमानी जीवन की घटनाओं का सिलसिला क्रमानुसार नहीं रखा गया है। यदि वास्तव में गणितशास्त्र में उनके योगदान को समझना हो तब उच्चतर गणित पढ़नी पड़ेगी।