सागर तट पर (श्रीलंका) कविता, हिंदीBy मघाAug. 19, 2020Leave a commentविहान में तट पर पछाड़ खाती लहरें, नहीं डुबो पातीं श्वान की चीत्कार को, न ही पवन के रविरश्मि गान उसे चुप कर पाते।