ऊर्जा चक्र, सनातन बोध : प्रसंस्करण, नये एवं अनुकृत सिद्धांत – 10

हम यदि बातों को अपने व्यवहार में लेकर आयेंं तो धीरे धीरे हमारी भावनायेंं उस स्तर पर स्वतः ही आ जाती हैं – ‘करत करत अभ्यास ते’ वाली बात। ऐसी कई बातें हमारी सोच को अनजाने प्रभावित करती रहती हैं। आधुनिक निर्णय शास्त्र (decision making) में प्रयुक्त होने वाले इस ‘नये सिद्धांत को पढ़ते हुए – संगति की सीख, वातावरण का प्रभाव – चाणक्य का ‘दीपो भक्षयते ध्वांतम कज्जलम च प्रसूयते’ या ‘तुलसी संगति साधु की’ जैसी कितनी पढ़ी हुई बातें याद आती हैं।

शम्भू

आज पता चला ‘शम्भू’ नहीं रहा। शम्भू  एक परंपरा की आखिरी कड़ी था। बहुत कुछ ऐसा था जो उसके साथ ही चला गया। उसकी कमी मुझे महसूस होगी। आजीवन। जिन्होंने भी उसे जाना लगभग सबको होगी। मुझे याद नहीं अपने परिवार के बाहर शम्भू के अतिरिक्त कोई भी और है जिससे मैं हर बार गाँव जाने…