Quantum Spin Liquid पदार्थ की नई अवस्था: क्वॉन्टम स्पिन लिक्विड, मायोराना फर्मियॉन कण तथा क़्वॉण्टम कम्प्यूटर

क़्वॉण्टम स्पिन लिक्विड में इलेक्ट्रॉनों के टूटने से उत्पन्न हुए मायोरना फर्मियॉन कण ‘एनटैंगल’ सूप की अवस्था में एक साथ कई क़्वॉण्टम अवस्थाएं परिलक्षित करते हैं अतएव ये कण भविष्य के क़्वॉण्टम कम्प्यूटर बनाने में प्रयुक्त हो सकते हैं जो आज के डिजिटल कम्प्यूटरों की तुलना में कहीं ज्यादा तीव्र गति से अरबों खरबों सूचनाओं की गणना कर सकेंगे।

मूलभूत इलेक्ट्रॉनिकी – भाग ३ पी एन डायोड (Basic Electronics – Part 3, P N Diode Junction)

भाग १ , २ ____________________________________________________ पहले भाग में हमने देखा कि कैसे पदार्थ तीन तरह के होते हैं – कंडक्टर (संवाहक conductor ), इंसुलेटर (विसंवाहक insulator ), एवं सेमि कंडक्टर (अर्ध संवाहक semiconductor ) जो साधारण परिस्थिति में तो इंसुलेटर हैं लेकिन विशेष स्थितियों में बिलकुल कंडक्टर की तरह बर्ताव करते हैं। परिशुद्ध या इंट्रिन्सिक सेमीकन्डक्टर की आणविक संरचना और इलेक्ट्रान व् होल्स का अलग होना भी पढ़ा ।  …

Basic Electronics मूलभूत इलेक्ट्रॉनिकी – भाग 2 (Part 2 Extrinsic)

Basic Electronics मूलभूत इलेक्ट्रॉनिकी  भाग 1  से आगे:  (मेरा आग्रह है कि इस शृंखला की कोई पोस्ट सीधे न पढ़ी जाय बल्कि पहले भाग से होते हुये समस्त पूरवर्ती कड़ियों की निरंतरता में पढ़ी जाय।)   पिछले भाग में हमने परमाणु की संरचना (ग्रुप ४) के पदार्थों में पाये जाने वाले संयोजी बंध और शुद्ध अर्ध संवाहकों पर चर्चा की।…

Basic Electronics मूलभूत इलेक्ट्रॉनिकी – भाग १ (Part 1)

Basic Electronics मूलभूत इलेक्ट्रॉनिकी मैं एक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर हूँ। सदा से महसूस करती आई हूँ कि काश हिंदी में पुस्तकें इससे संबन्धित जानकारी देती होतीं, तो कितने ही और लाभ ले पाते।  सो अपनी एक छोटी सी शुरुआत कर रही हूँ।  मुझे लगता है कि पहले २-३ भागों में जो आयेगा उसे विज्ञान से जुड़े सामान्य…

नक्षत्र परिचय – 2 (ग्रीष्म अयनांत के बहाने)

रामायण में वर्णित ‘ऐरावत की सूँड़’ (Scorpio) स्पष्ट दिखती है। इसी में अनुराधा और ज्येष्ठा हैं। बिच्छू का डंक ही मूल नक्षत्र है। चित्रा और मूल को मिलाने वाली रेखा पर तुला राशि में हैं विशाखा (Brachium)। 

नक्षत्र परिचय – 1

नक्षत्रों को पहचानने से पहले दिशा ज्ञान आवश्यक है। आधुनिक युग की आपाधापी में हममें से बहुतों को दिशायें नहीं पता क्यों कि कृत्रिम जीवन और विहार के कारण सूर्योदय और सूर्यास्त के दर्शन और महीनों के बीतने के साथ उन बिन्दुओं की सापेक्ष गति के प्रेक्षण से हमारा सम्बन्ध समाप्त हो चुका है। अस्तु। …