पूर्वी उत्तरप्रदेश में जन्मे एवं जानपद अभियांत्रिकी में परास्नातक गिरिजेश राव स्वयं को 'भारत विद्या' का एक विद्यार्थी मात्र कहते हैं जो जाने कितने लम्बे पथ का पथिक है।

Narad Puran नारदपुराण [पुराण चर्चा – 1, विष्णु दशावतार तथा बुद्ध – 7]

विष्णु के नयनों के जल से बिन्दुसर जिसमें स्नान से शङ्कर के हाथ से ब्रह्मा का कपाल छूटा, कपालमोचन तीर्थ बना। विष्णु काशी में बिन्‍दुमाधव नाम से विराजमान हुये

वाल्मीकीय रामायण से – 35, सुन्‍दरकाण्ड [रामस्य शोकेन समानशोका]

रामस्य शोकेन समानशोका … हे वानर ! जो तुमने यह कहा कि राम का मन अन्य की ओर लगता ही नहीं एवं वे शोकनिमग्न रहते हैं, वह मुझे विषमिश्रित अमृत के समान लगा है ।

Agni Puran अग्निपुराण [पुराण चर्चा – 1, विष्णु दशावतार तथा बुद्ध – 6]

Agni Puran अग्निपुराण : अश्वशिर (हयग्रीव) एवं दत्तात्रेय, दो अन्य नाम हैं जो अन्य पुराणों की अवतार सूचियों में उपस्थित रहे हैं।

Minority अल्पसंख्यक कौन हैं? भारतीय विधि विधान का सच

Minority अल्पसंख्यक , भारतीय संविधान में न कोई मानदण्ड हैं, न ही जनसंख्या प्रतिशत सीमायें ही निर्धारित हैं, केन्द्रीय अधिसूचनाओं द्वारा निर्धारित।

पुराणों में क्या है -1 : विष्णु दशावतार तथा बुद्ध – 5 [ Matsya Puran मत्स्य पुराण ]

Matsya Puran मत्स्य पुराण में परशुराम संज्ञा नहीं है, न उनके अवतरण की कोई कथा एवं न ही किसी प्रतिशोध की। भार्गव राम या राम जामदग्न्य उल्लिखित हैं।

आदिकाव्य रामायण से – 34, सुन्‍दरकाण्ड [वचोऽभिरामं रामार्थयुक्तं विरराम रामा]

न चास्य माता न पिता च नान्यः स्नेहाद्विशिष्टोऽस्ति मया समो वा ।
तावत्त्वहं दूत जिजीविषेयं यावत्प्रवृत्तिं शृणुयां प्रियस्य ॥
न माता से, न पिता से एवं न किसी अन्य से उनका प्रेम, मेरे प्रति प्रेम से विशिष्ट है (अर्थात मेरे प्रति उनका प्रेम समस्त सम्बन्‍धों के प्रेम से विशिष्ट है)।
अत:, हे दूत ! मेरी जीने की इच्छा तब तक ही बनी रहनी है, जब तक मैं अपने प्रिय का वृतान्‍त सुनती रहूँ।

आदिकाव्य रामायण से – 33, सुन्‍दरकाण्ड [विक्रान्तस्त्वं समर्थस्त्वं प्राज्ञस्त्वं वानरोत्तम]

Valmiki Ramayan Sundarkand वाल्मीकीय रामायण सुन्‍दरकाण्ड : तुम विक्रान्‍त हो, समर्थ हो, प्राज्ञ हो, तुमने अकेले ही राक्षस राजधानी को प्रधर्षित कर दिया है।