नानक की बाबरवाणी

नानक की बाबरवाणी : द्वेष से खलासी असम्भव!

मुगलों के अत्याचार पर तुलसीदास ने भी लिखा – खेती न किसान को भिखारी को न भीख … किंतु उनका स्वर आक्रोश से भरे भक्त का है जिसमें लोक के प्रति करुणा ही करुणा है न कि नानक जैसे सूफी हिंसक आनन्द कि छाँई कि अच्छा हुआ जो ईश्वर ने इस प्रकार दण्डित किया।

गुरग्रन्थ में ‘मुक्ति’ हेतु ‘खलासी’ शब्द शताधिक बार दुहराया गया है किन्‍तु मूल के ही गड़बड़ होने के कारण खालिस्तानी द्वेष व मिथ्या श्रेष्ठताबोध के विष से ‘खलासी’ पायेंगे, इसमें शङ्का ही शङ्का है।

Mallard नीलसर। चित्र सर्वाधिकार: आजाद सिंह, © Ajad Singh, सराही झील, राम सनेही घाट, बाराबंकी-225409, उत्तर प्रदेश, February 08, 2020

Mallard नीलसर

Mallard नीलसर। संस्कृत में इनका सामान्य नाम कारण्डव है। इसे बन्‍धुर कारण्डव तथा मञ्जुप्लव भी कहते हैं – अथ बन्धुर: कारण्डव: प्लवो मञ्जु:।
प्रणयकाल में ये पक्षी बहुत अधिक ऊँचाई पर वृत्ताकार पथ पर उड़ते, कलरव एवं क्रीड़ा करते हुये पाये गये हैं। एक मादा को अनेक नर रिझाने के प्रयास करते हैं। इनकी यह क्रीड़ा नादावर्त्त कही गयी है – हंसकारण्डवचक्रवाकादीनाम्‌ व्योम्नि क्रीडतामावर्त्तो नादावर्त्त:।

शतक सिंहावलोकन

शतक सिंहावलोकन

शतक सिंहावलोकन,
आज मघा का शतकाङ्क है अर्थात इसे प्रकाशित होते हुये सौ पक्ष पूरे हो गये, कुल १४७७ दिन। विक्रम संवत २०७३ की पौष पूर्णिमा को इसका शून्याङ्क प्रकाशित हुआ था।

अमरकोश शब्द : लघु दीप

नाम अमरकोश से : लघु दीप – ३६

चन्दन आदि को घिसने से उत्पन्न सुगन्धि को परिमल कहते हैं।
दूर तक पसरने वाली सुगन्‍ध को समाकर्षी एवं निर्हारी नाम दिये गये हैं।
सुगन्धि के चार नाम हैं – सुरभि, घ्राणतर्पण, इष्टगन्‍ध एवं सुगन्धि।
मुख को सुगन्‍धित करने वाले द्रव्य आमोदी एवं मुखवासन कहे गये हैं।
दुर्गन्‍ध के दो नाम हैं, पूतिगन्‍धि एवं दुर्गन्ध।
कच्चे मांस की गन्ध को विस्र एवं आमगन्धि नाम दिया गये हैं।

Phishing ठगी छल-योजनादि

Phishing ठगी छल-योजनादि : सनातन बोध – ८९

Phishing ठगी छल-योजनादि – अज्ञानवश पतङ्ग दीपक की लौ में अपने को भस्म कर लेता है। स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो, बुद्धिनाशात्प्रणश्यति।
फ़िशिंग अर्थात् अन्तर्जाल पर कुशलतापूर्वक निर्मित छलयोजना से किसी व्यक्ति की मानसिक अवस्था को इस प्रकार साधित करना जिससे प्रभावित होकर वह अपनी गुप्त जानकारी, धन, प्रिय वस्तु इत्यादि गँवा बैठे। सुनने में ऐसा प्रतीत होता है मानो विरले कोई मूर्ख ही ऐसा करता होगा परंतु आश्चर्यजनक रूप से आधुनिक युग में भी ठीक ऐसी ही योजनाएँ चलती हैं जिनमें फँसने वाले व्यक्तियों की संख्या प्रतिदिन लाखों में है।

Common Kingfisher मछरेंगा। चित्र सर्वाधिकार: आजाद सिंह, © Ajad Singh, सरयू, आर्द्र भूमि, माझा, अयोध्या-224001, उत्तर प्रदेश, July 30, 2019

Common Kingfisher मछरेंगा, छोटा-किलकिला

छोटा किलकिला का जो वर्ण नील-हरित सदृश दिखता है वह उसके पंखों में नहीं होता है अपितु प्रकाश के इन्द्रधनुष प्रभाव जैसे बनता है और इसीलिए प्रत्येक समय प्रत्येक कोंण से यह वर्ण सदैव भिन्न-भिन्न दिखाई देता है और वर्ण परिवर्तित होता सा लगता है। इसके नेत्र प्रकाश ध्रुवीकरण (light polarization) की क्षमता से युक्त होते हैं जिस कारण इसे जल सतह पर तीव्र सूर्य प्रकाश में भी सरलता से जलीय जन्तु दिखाई देते हैं एवं इसे मज्जन कर आखेट में समस्या नहीं आती।

Detachment अनासक्ति निर्णय कर्म

Detachment अनासक्ति निर्णय कर्म : सनातन बोध – ८७

Detachment अर्थात् अनासक्ति। इसका एक निष्कर्ष यह भी है कि आसक्ति में एवं भावना में बहकर कभी अर्थपूर्ण निर्णय और कार्य नहीं किए जा सकते। सहानुभूति के साथ-साथ अनासक्त अवलोकन की कहीं अधिक आवश्यकता है। तभी उसे करुणा तथा समुचित कर्म में परिवर्तित किया जा सकता है – स्वजनों के लिए भी एवं बृहत् स्तर पर मानवता के लिए भी, अन्यथा व्यक्ति सोचता ही रह जाएगा और चिंतित भी रहेगा।

सहज न समुझे कोय, तन्त्र के शिव-स्वरुप गुरु दत्तात्रेय आविर्भाव दिवस

सहज न समुझे कोय … क॒वयो॑ मनी॒षा

आज मार्गशीर्ष की पूर्णिमा है न? आज तन्त्र के शिव-स्वरुप गुरु दत्तात्रेय का आविर्भाव-दिवस है। और मेरा मन अखिल राष्ट्र को, तन्त्र की आदि-योनि स्वरूपा त्रिकोणाकृति इस भारत-भू की समस्त सनातन भारती-प्रजा को, भगवान् श्री दत्तात्रेय जयन्ती की अनन्त-अशेष हार्दिक शुभकामनायें देते हुए यह प्रार्थना कर रहा है –
ॐ सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः। भवे भवे नातिभवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः ॥
मैं सद्योजात की शरण हूँ, सद्योजात को नमस्कार है, जन्म-जन्मान्तरों के किसी भी जन्म में मेरा अतिभव – पराभव न हो! हे भवोद्भव! आपको मेरा नमस्कार है।

अमरकोश : कुछ प्रचलित शब्द : लघु दीप

Amarkosha अमरकोश, कुछ प्रचलित शब्द : लघु दीप – ३४

पहुना, पाहुन (भोजपुरी, मैथिली आदि), संस्कृत में प्राघुणक।
प्राघूर्णिक: प्राघुणकश्च। – अभ्यागत हेतु।
अमरकोश से निकलते, कुछ प्रचलित शब्द आज के लघु दीप में।

भारती संवत संवत्सर नाम

भारती संवत : संवत्सर नाम, मास एवं तिथियाँ (१, महाश्रावण, मास तप)

भारती संवत : संवत्सर नाम – इस वर्ष अस्त के पश्चात गुरु का उदय श्रावण नक्षत्र में होगा, अत: यह संवत्सर हुआ – महाश्रावण। मास : तप-मृगशिरा।
भारती संवत में महीना पूर्णिमा से आरम्भ हो कर शुक्ल चतुर्दशी को समाप्त होगा।
तिथि का गणित वही रहेगा जो है किन्तु यदि तिथि परिवर्तन सूर्योदय से सूर्यास्त के पूर्व कभी भी हो गया तो उस दिन वह तिथि मान ली जायेगी, भले उदया न हो। उदाहरण के लिये, कल पूर्णिमा सूर्य के रहते ही हो गई थी, अत: पूर्णिमा कल की मानी जायेगी।

quran

Love jihad नहीं, यौन जिहाद। न, न, अब्राहमी आक्रमणों का प्रतिकार ऐसे नहीं!

अल्पकालिक हो या दीर्घकालिक, जीर्ण हो या त्वरित; किसी भी समस्या से निपटने या उसके समाधान हेतु जो कुछ किया जाता है, वह व्यक्ति, समूह या तन्त्र में अन्तर्निहित उसकी सकल निर्मिति पर निर्भर होता है तथा परिणाम की गति व दिशा भी उसी पर निर्भर होते हैं। निर्मिति मूल मान्यताओं, मूल्यों, प्राथमिकताओं और प्रवृत्ति की देन होती है जो एक दिन में नहीं बन जाती, दीर्घकालिक सम्यक सतत कर्म की देन होती है। चरित्र महत्त्वपूर्ण होता है।

Corruption is Contagious

भ्रष्टाचार, कुसंग और दण्ड : सनातन बोध – ८६

शोध इस बात को इंगित करते हैं कि यदि हम अन्य लोगों को भ्रष्ट आचरण करते हुए देखते हैं तो हम भी उससे प्रभावित होते हैं। हमें यह एक सामान्य प्रक्रिया लगने लगती है। उत्कोच एक संक्रामक महामारी की तरह है।

पुरा नवं भवति

पुरा नवं भवति

भारत में इतिहास को काव्य के माध्यम से जीवित रखा गया। स्वाभाविक ही है कि ऐसे में कवि कल्पनायें नर्तन करेंगी ही। कल्पना जनित पूर्ति दो प्रकार की होती है, एक वह जो तथ्य को बिना छेड़े शृङ्गार करती है, दूसरी वह जो तथ्य को भी परिस्थिति की माँग के अनुसार परिवर्तित कर देती है। दूसरी प्रवृत्ति की उदाहरण रामायण एवं महाभारत, दो आख्यानक इतिहासों, पर आधारित शताधिक रचनायें हैं जिनमें पुराण भी हैं। आख्यान का अर्थ समझ लेंगे तो बात स्पष्ट होगी। आख्यान आँखों देखी रचना होते हैं।

मूल में भी क्षेपक जोड़े गये जिनका अभिज्ञान कठिन है किन्तु असम्भव नहीं।

गले कटवाते रहना घोर तामस है! जीवन्त जाति का लक्षण नहीं।

गले कटवाते रहना घोर तामस है! जीवन्त जाति का लक्षण नहीं।

गले कटवाते रहना घोर तामस है! जीवन्त जाति का लक्षण नहीं। हमें किसी का गला नहीं रेतना है किंतु कोई हमारा गला न रेत जाये, इसके लिये बली बनना है, शारीरिक रूप से भी, मानसिक रूप से भी।

Distance from self अनासक्ति व Solomon's Paradox

Distance from self अनासक्ति व Solomon’s Paradox : सनातन बोध – ८४

Distance from self अनासक्ति – Solomon’s Paradox अन्य को सुझाव देना हो तो हम भली-भाँति विचार कर देते हैं पर स्वयं के लिए वैसा नहीं कर पाते। Distance from self तो स्पष्टतः निष्काम कर्म का विशेष रूप ही है — कार्य-फल की आकांक्षा से रहित हो – सम्बंध, सामाजिक विरोध, रचनात्मकता ही क्यों, जीवन का प्रत्येक कार्य ही निष्काम हो।

Striated Babbler बड़ा चिलचिल। चित्र सर्वाधिकार: आजाद सिंह, © Ajad Singh, सरयू आर्द्र भूमि, माझा, अयोध्या-224001, उत्तर प्रदेश, May 07, 2017

Striated Babbler बड़ा चिलचिल

बड़ा चिलचिल लगभग १० इंच का एक चञ्चल पक्षी है जो बड़ी-बड़ी घासों के बीच में ७ से १० के झुण्ड में दिखाई पड़ता है। इसके नर एवं मादा एक जैसे होते हैं। समभौमिक क्षेत्रों का पक्षी है जो पंजाब से लेकर गांगेय क्षेत्रों से होते हुए ब्रह्मपुत्र के क्षेत्र, नेपाल की आर्द्रभूमि, असम, बंगाल और ओडिशा के महानदी के नदीमुख क्षेत्र तक पाया जाता है।

धर्षण rape कोलाहल विद्या : सा विद्या या विमुक्तये

धर्षण rape कोलाहल विद्या : सा विद्या या विमुक्तये

धर्षण rape कोलाहल विद्या -कृत्रिम औचित्य के चक्कर में पुरुष अपने गुणों को ही गँवा देगा तो जो महती क्षति वह स्त्रियों को अधिक कुप्रभावित करेगी। किसी भी सभ्य समाज में जननी स्वरूपा स्त्री का सम्मान व सुरक्षा बड़े आदर्श होते हैं, हमारे यहाँ भी हैं और रहेंगे किंतु यह भी सच है कि उन्हें बनाये रखने हेतु मानसिक रूप से स्वस्थ, आत्मग्लानि या आत्मघाती वितृष्णा से मुक्त धर्मनिष्ठ साहसी पुरुष परम आवश्यक हैं, तब और जब कोई समाज चहुँओर आक्रमणों को झेल रहा हो।

यूआरएल स्लग क्या है

यूआरएल स्लग क्या है

इन्टरनेट, वेब ब्राउज़र आदि पर घूमते हुए आपको कभी ‘स्लग (Slug)’ यूआरएल का नाम सुनाई दिया। पर्मालिंक, शोर्ट लिंक, प्रीटी पर्मालिंक (Pretty Permalink) आदि शब्द। जी हाँ आज यही जानते हैं ये क्या है?