Let go बीती ताहि बिसार दे : सनातन बोध Forgetting is Key to Healthy Mind

Let go बीती ताहि बिसार दे जैसी उक्तियों में यही बात है। अतीत को भूल वर्तमान में जीने का दर्शन तो निर्विवाद सनातन ही है। ‘बंधनम् मुच्यते मुक्ति’।

सामाजिक संचार माध्यम : सुविधा या जटिलता

सनातन दर्शनों की विशेषता यही है कि मानव मस्तिष्क की जो विवेचना उसमें की गयी है वो विभिन्न देश, काल एवं परिस्थिति के अनुसार भी सत्य है। यथा सभा का स्वरूप भले परिवर्तित हो गया हो परन्तु उस सभा में कब क्या बोलना चाहिए, किससे प्रेम करना चाहिए तथा कब और कितना क्रोध करना चाहिए जो इन बातों को जानता है उसे ही तो अब भी पंडित कहा जाएगा

परोपकार Selfless help : सनातन बोध

व्यसनी,धोखाधड़ी आदि में लिप्त व्यक्ति अर्थात जिन्हें परोपकार से कुछ लेना देना नहीं था, से जब छोटे परोपकार के कार्य कराए गए तो उनकी प्रसन्नता में वृद्धि हुई।

प्रकृति के सान्निध्य से मनोवैज्ञानिक लाभ

वन-वृक्ष-नदी-पर्वत का साधना से क्या सम्बन्ध ? ग्रंथ, ऋषि वाणियाँ प्रकृति वर्णन से क्यों भरे पड़े है? वनों में ऐसा क्या प्राप्त हो जाता है जो सामान्य नगरों में नहीं मिलता?

भोजन का सनातन दर्शन एवं आधुनिक मनोवैज्ञानिक शोध

भोजन का सनातन दर्शन। क्या अन्य कार्य करते हुए भोजन करने से कोई हानि-लाभ जुड़ा है। आज के व्यस्त जीवन में भागते हुए भोजन करने पर आज का मनोविज्ञान क्या कहता है।

Paradox of Choices, craving of best, seek of happiness

Maximiser vs Satisficer सर्वोत्तम की चाहना, विकल्प एवं सुख

Maximiser Vs Satisficer, मनोवैज्ञानकों ने निर्णय लेने के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण दो सरल रूपों में किया है – एक वे जो प्रत्येक निर्णय को इस प्रकार लेने का प्रयत्न करते हैं जिससे उन्हें अधिकतम लाभ मिले (maximiser), इन व्यक्तियों को अपने निर्णयों के पूर्णत: दोषमुक्त (perfect) होने चिंता बनी रहती है। और दूसरे वे जो अपने निर्णयों से प्रायः संतुष्ट होते हैं।

monotheism vs polytheism

Sanātana Darśana Monotheism Polytheism कति देवाः?

Sanātana Darśana Monotheism Polytheism कति देवाः? आठ वसु, एकादश रुद्र, द्वादश आदित्य, इन्‍द्र एवं प्रजापति, कुल तैंतिस। पूरा प्रकरण एक ऐसी प्रवाहमान धारा को इङ्गित करता है जिसकी पूरी व्याख्या अब अनुपलब्ध है।