परोपकार Selfless help : सनातन बोध

व्यसनी,धोखाधड़ी आदि में लिप्त व्यक्ति अर्थात जिन्हें परोपकार से कुछ लेना देना नहीं था, से जब छोटे परोपकार के कार्य कराए गए तो उनकी प्रसन्नता में वृद्धि हुई।

प्रकृति के सान्निध्य से मनोवैज्ञानिक लाभ

वन-वृक्ष-नदी-पर्वत का साधना से क्या सम्बन्ध ? ग्रंथ, ऋषि वाणियाँ प्रकृति वर्णन से क्यों भरे पड़े है? वनों में ऐसा क्या प्राप्त हो जाता है जो सामान्य नगरों में नहीं मिलता?

भोजन का सनातन दर्शन एवं आधुनिक मनोवैज्ञानिक शोध

भोजन का सनातन दर्शन। क्या अन्य कार्य करते हुए भोजन करने से कोई हानि-लाभ जुड़ा है। आज के व्यस्त जीवन में भागते हुए भोजन करने पर आज का मनोविज्ञान क्या कहता है।

Paradox of Choices, craving of best, seek of happiness

Maximiser vs Satisficer सर्वोत्तम की चाहना, विकल्प एवं सुख

Maximiser Vs Satisficer, मनोवैज्ञानकों ने निर्णय लेने के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण दो सरल रूपों में किया है – एक वे जो प्रत्येक निर्णय को इस प्रकार लेने का प्रयत्न करते हैं जिससे उन्हें अधिकतम लाभ मिले (maximiser), इन व्यक्तियों को अपने निर्णयों के पूर्णत: दोषमुक्त (perfect) होने चिंता बनी रहती है। और दूसरे वे जो अपने निर्णयों से प्रायः संतुष्ट होते हैं।

monotheism vs polytheism

Sanātana Darśana Monotheism Polytheism कति देवाः?

Sanātana Darśana Monotheism Polytheism कति देवाः? आठ वसु, एकादश रुद्र, द्वादश आदित्य, इन्‍द्र एवं प्रजापति, कुल तैंतिस। पूरा प्रकरण एक ऐसी प्रवाहमान धारा को इङ्गित करता है जिसकी पूरी व्याख्या अब अनुपलब्ध है।

Hume, do you too sense, western Dharma films (like The Matrix) are allegories of Sanātana Darśana

पश्चिमी दर्शन, फ़िल्म,साहित्य में सनातन दर्शन का संदर्भ मुख्यतया प्रायः बौद्ध दर्शन के रूप में मिलता है। सम्भवतः इसका कारण पश्चिमी अब्राहमिक धर्मों के ईश्वरदूत (prophet) के रूप में किसी एक व्यक्ति विशेष को देखने की प्रवृत्ति हो जिसे वे तथागत के रूप में देख इस दर्शन की ओर आकर्षित होते हों। परन्तु सत्य तो यह है कि बौद्ध दर्शन विस्तृत सनातन दर्शन का विरोधाभासी न होकर उस विशाल वटवृक्ष की एक विशेष शाखा ही है।

Indian Philosophy vs Western Philosophy : सनातन बोध

उपनिषद भौतिक लक्ष्य से परे का दर्शन है। जबकि यूनानी दर्शन (प्लेटो) अनुसार मनुष्य अपनी ऊर्जा से भौतिक जीवन के उन्नत रूपों (forms) को पा सकता है। कठोपनिषद का लक्ष्य उन्नत रूप तथा भौतिक सुख के स्थान पर आत्म-अन्वेषण, बुद्धि और परम लक्ष्य की दिशा में है। यूनानी दार्शनिकों ने सनातन दर्शन के अनेक सिद्धांतों को अपना कर उन्हें पश्चिमी जनमानस के लिए पुनर्संस्कृत किया।