Vyanjan Sandhi व्यञ्जन सन्धि या हल् संंधि – १ : सरल संस्कृत – ९
Vyanjan Sandhi व्यञ्जन सन्धि – संस्कृत में प्रत्ययों के अतिरिक्त मूल भी होते हैं। किसी भी शब्द का विच्छेद करते हुये उसके मूल तक पहुँचा जा सकता है। मूल क्रिया आधारित हों अर्थात उनमें किसी कुछ करने का बोध हो तो वे धातु कहलाते हैं यथा युज् जो जोड़ने के अर्थ में है जिससे योक्त, युक्त, योक्ता जैसे शब्द बने हैं।
Political Correctness नयसत्यता व कुल संस्कार प्रभाव : सनातन बोध – ६०
जीव विज्ञान तथा आनुवंशिकी का संदर्भ देकर कुल, संस्कृति इत्यादि के प्रभाव को नकारने वाले ये भूल जाते हैं कि संस्कृति, धर्म, परिवेश तथा जाति (Ethnicity) का व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव होता है।
Browser synchronization सूचना की तादात्म्यता
ब्राउज़र सिंक्रोनाइजेशन। अर्थात भिन्न-भिन्न मशीनों, भिन्न-भिन्न स्थानों पर कार्य करते हुए भी अपने वेब ब्राउज़र की सूचनाएँ पहुँच में बनाये रखना या सूचना की अभिन्नता बनाये रखना।
Large-billed Crow जंगली कौवा, वनकाक, काकोल
संस्कृत साहित्य में कौवे अनेक कारणों से बहुचर्च्चित हैं तथा पक्षियों में कौवे के सर्वाधिक पर्यायवाची उपलब्ध हैं। कौवे हेतु रामायण व महाभारत में वायस सञ्ज्ञा बहुत प्रचलित है। भारत में इन पक्षियों के सात प्रमुख प्रकार हैं।
बलात्कार यौन दुष्कर्म बिंदास – नवरात्र पर्व पर मंथन आवश्यक है।
आज पितरों की बिदाई है, कल से माँ का आगमन हो रहा है। ऐसी संधि पर एक बहुत ही ज्वलंत समस्या पर विचार किया जाना चाहिये – हिंदू ललनाओं के साथ बढ़ रहे जिहादी यौन दुष्कर्मों पर।
