Joshua Project जोशुआ ‘परमेश्वर यादवों से प्रेम करता है’

Joshua Project : ‘जोशुआ प्रोजेक्ट’ ‘फ्रण्टियर वेंचर्स’ की एक मिनिस्ट्री है जिसने इसाइयत के प्रसार के लिये ‘10/40 खिड़की’ पर स्वयं को केन्द्रित रखा है। भूगोल अक्षांश 10 अंश से ले कर 40 अंश तक (और उनसे लगे हुये) विराट भू भाग को यह नाम दिया गया है जिसमें विश्व की हिन्दू, बौद्ध और मुसलिम जनसंख्या का बहुसंख्य निवास करता है।

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चलते चलते

चलते चलते पोथीधर दिल्ली के प्रगति मैदान में ‘पुस्तक मेले’ का समय है। कई लोग पुस्तकों से प्रेम करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे किसी दूसरी सजावटी वस्तु से जैसे – गमला, पेपरवेट आदि। पुस्तकें खरीदते हैं और सजा कर प्रदर्श में रख देते हैं। पढ़ते कदापि नहीं। यही भर नहीं, अपने इस दोष का…

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Indian Robin Saxicoloides fulicata भुजइन [जैव विविधता: अवधी चिरइयाँ]

Indian Robin Saxicoloides fulicata भुजइन वैज्ञानिक नाम: Saxicoloides fulicata स्थानीय नाम: भुजइन, कलचुरी, गँड़ुलर, फुदकी चित्र स्थान और दिनाङ्क: अयोध्या (उत्तरप्रदेश), 06/01/2017, चित्र मादा चिड़िया का है। छाया चित्रकार (Photographer): आजाद सिंह लक्षण, चरित्र और स्वभाव: नर काले रंग का, पंख पर सफेद धब्बा और उठी हुई पूँछ, पूँछ की निचले छोर पर जंग जैसा…

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वयं सम्‍बद्धाः!!

ऋषि, मनीषियों और विचारकों की भाषा संस्कृत हमारे संस्कृति ज्ञान की पहली सीढ़ी है। अस्माकं जीवने न केवलं अस्माकं व्यवहारः, दैनन्दिन कार्यकलापाः, परस्पर वार्ताः अपितु सर्वाः क्रियाः अस्माकं चरित्रं दर्शयन्ति। सामान्याः भारतीयजनाः तेषां जीवने, वेद अथवा वेदाधारित अन्यान्य ग्रन्थान् तथाच तेषां चरित्रानुसरणं कुर्वन्ति। इयं वेदाधारित जीवन पद्धतिः अस्माकं भारतीय संस्कृतिः। भारतीय जनमानस चरित्रं च अवगन्तुं…

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आपन बाति: सोच, सङ्कट और उद्योग

पानी की समस्या से जूझते शीत शुष्क मरुस्थल कहे जाने वाले लद्दाख के सोनम वांगचुक के सामने भी यही प्रश्न था। वह आगे बढ़े। बर्फ के ऊँचे टीले बना कर जलदोहन का नव्य सफल प्रयोग कर डाले। उनके बनाये ‘हिमस्तूपों’ और नलिकाओं की साधारण सी संरचना में गुरुत्व बल के चतुर उपयोग से जल ‘उत्पादित’ होता है जिसका प्रयोग सिंचाई के लिये किया जाता है। उस जल की ड्रिप सिंचाई से शस्य लहलहा रही है।  आगे उनकी योजना 30 मीटर ऊँचे बीसों स्तूपों के निर्माण की है।

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काल गणना में खिसकती मकर संक्रांति

हम जानते हैं कि पृथ्‍वी की मूल रूप से दो गतियाँ होती हैं, अपने अक्ष पर घूर्णन की और सूर्य की परिक्रमा की, परंतु हम पृथ्‍वी की दो और गतियों पर लगातार निर्भर हैं, उनमें से एक है – अक्ष पर घूर्णन करते समय साढ़े तेईस अंश के झुकाव के कारण ऊर्ध्व अक्ष की वृत्तीय…

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चित्र लेख : मल्लाह के बच्चे

बनारस में वैसे तो मल्लाहों की बस्ती वाला ‘निषाद राज घाट’ भी है लेकिन नये बने ‘रविदास घाट’ (असी घाट से आगे) से लेकर वरुणा और गङ्गा के संगम तट पर स्थित ‘आदिकेशव घाट’ तक फैले अस्सी घाटों तक निरंतर बहती हैं नावें और दिखते हैं निषाद जिन्हें हम मल्लाह, केवट, माझी आदि नामों से…

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श्रीनिवास रामानुजन ‘गणितं मूर्धनि स्थितम्’

रामानुजन अपने आप में एक बहुत ही विचित्र, भोले, दृढ़ संकल्पित, कुंठित, हँसमुख और साधारण व्यक्ति थे। आप कह सकते हैं कि मेरे पास विशेषण नहीं हैं इसलिये मैंने विरोधाभासी शब्द लिख दिये हैं। ऐसे व्यक्ति को समझने का प्रयास करना आसान भी नहीं है। इस आलेख में रामानुजन की अतुलनीय मेधा की एक झलक से परिचय कराने का मेरा प्रयास है। श्रीनिवास रामानुजन के रूमानी जीवन की घटनाओं का सिलसिला क्रमानुसार नहीं रखा गया है। यदि वास्तव में गणितशास्त्र में उनके योगदान को समझना हो तब उच्चतर गणित पढ़नी पड़ेगी।

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