वस्त्र गाथा और नारीवाद

वस्त्र गाथा

भाँति भाँति का फैशन क्या है और महिलाओं में वस्त्रों को लेकर प्रतिस्पर्धा कहाँ से आई? इस प्रश्न का एक शब्द में उत्तर है बाजारवाद। कुछ दिन पहले टहलते समय मेरी लगभग दस साल की बेटी ने प्रश्न किया कि क्या बड़े होने पर लड़कियों को छोटे कपडे नहीं पहनने चाहिए?

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मघा : भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

अमावस आकृतियाँ

आज अमावस्या के दिन सूर्य चंद्र के साथ मघा नक्षत्र पर विराजमान हैं। सिंह राशि में पड़ने वाले मघा नक्षत्र का प्रतीक है राजसिंहासन और इसके नाम के मूल मघ को समृद्धि, सम्पदा, ऐश्वर्य आदि से समझा जा सकता है। उससे पूर्व का अश्लेषा आलिङ्गन है।

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प्रच्छन्न अनुच्छेद

प्रच्छन्न अनुच्छेद

लक्ष्मी-वाहन को लक्ष्मी के अतिरिक्त भी किसी अन्य लाभ की आकांक्षा हो सकती है यह जान कर शुक्राचार्य को आश्चर्य हुआ। उन्होंने उलूक से कहा,“हे पक्षिराज! उलूक-मंतव्य सामान्य जनों हेतु सदा स्पष्ट नहीं होते! आप अपना वांछित स्वयं कहें!”

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सीढ़ियाँ (बांग्लादेश से) भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

सीढ़ियाँ (बांग्लादेश)

हम सीढ़ियाँ हैं 

रौंदते हो जिन्हें
प्रतिदिन तुम
ऊँचे उठने को।

तब तुम
न रुकते कभी,
न देखते कभी मुड़।

तुम्हारे पाँव भी फिसलेंगे
एक दिन,
हमायूँ की भाँति।

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Eurasian Collared-dove धवल कपोतक। चित्र सर्वाधिकार: आजाद सिंह, © Ajad Singh, सरयू आर्द्र भूमि, माझा, अयोध्या-224001, उत्तर प्रदेश, June 07, 2020

Eurasian Collared-Dove धवल कपोतक

धवल पण्डुक के नर और मादा अभिज्ञान में समान रंग-रूप के होते हैं। इनका वर्ण तनिक भूरा सिलेटी होता है। ग्रीवा पर पार्श्व में अर्ध वलयाकार कृष्ण वर्णीय पट्टिका होती है जिससे इसकी पहचान सरल हो जाती है।

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मेरा इतिहास मेरा अपना नहीं (म्यान्मार) भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

मेरा इतिहास मेरा अपना नहीं (म्यान्मार)

मर कर भी मैं निर्वासित था
उन्होंने मेरे अवलम्ब प्रलेख भी पूरे न लिखे
मर कर भी मेरे पास
आवास अनुमति पत्र न था ।
उन्होंने मेरी मौत लिख दी है
उन्होंने मेरी मौत मरुत पर लिख दी है
उन्होंने … उन्होंने… उन्होंने मेरी मौत जल पर भी लिख दी है

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परित्यक्त गाँव (नेपाल) भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

परित्यक्त गाँव (नेपाल)

दनुआर लोग
जो कभी फूँकते रहते थे प्राण
इन प्रस्थों के ऊपर,
ग्रस लिये गये
अधपके अरबी सपनों
और
नागर गुहा-मुखों द्वारा ।

जहाँ कभी पण्य और पंसार
के थे प्रसार ,
वहाँ बचे केवल अब
भूले स्वप्न
और
मृत पुरनियों के प्रेत।

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अनाम प्रेमिका की अनाम (अफगानिस्तान से) भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

अनाम प्रेमिका की अनाम (अफगानिस्तान)

लिखा है मेरी देह पर, प्रीतम का नाम
धुल जायेगा, न करूँ स्नान

सब पहनेंगे स्वच्छ वस्त्र, कल उत्सव के दिन
पहनूँ मैं वे ही मैल कुचैल, प्रियतम के सब गन्ध

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