मघा : भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

अमावस आकृतियाँ

आज अमावस्या के दिन सूर्य चंद्र के साथ मघा नक्षत्र पर विराजमान हैं। सिंह राशि में पड़ने वाले मघा नक्षत्र का प्रतीक है राजसिंहासन और इसके नाम के मूल मघ को समृद्धि, सम्पदा, ऐश्वर्य आदि से समझा जा सकता है। उससे पूर्व का अश्लेषा आलिङ्गन है।

आमुख
अनाम प्रेमिका की अनाम (अफगानिस्तान से) भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

अनाम प्रेमिका की अनाम (अफगानिस्तान)

लिखा है मेरी देह पर, प्रीतम का नाम
धुल जायेगा, न करूँ स्नान

सब पहनेंगे स्वच्छ वस्त्र, कल उत्सव के दिन
पहनूँ मैं वे ही मैल कुचैल, प्रियतम के सब गन्ध

पढ़ें
जब मैं नहीं रहूँगा (भूटान से) भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

जब मैं नहीं रहूँगा (भूटान)

क्यों कि जब मैं नहीं रहूँगा, और तुम वियोगसिक्त,
जब मैं हो रहूँगा तुम्हारी पहुँच से दूर बहुत
तुम्हारे अनसुने शब्द हो रहेंगे तिरोहित मात्र,
तुम्हारी ऊष्मा हो रहेगी यूँ ही शीतल
और बेड़ियों में बच रहेगा तुम्हारा स्व शोकार्त।

अत: जब हो सक्षम, मुझसे करो प्यार!!!

पढ़ें
मेरा इतिहास मेरा अपना नहीं (म्यान्मार) भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

मेरा इतिहास मेरा अपना नहीं (म्यान्मार)

मर कर भी मैं निर्वासित था
उन्होंने मेरे अवलम्ब प्रलेख भी पूरे न लिखे
मर कर भी मेरे पास
आवास अनुमति पत्र न था ।
उन्होंने मेरी मौत लिख दी है
उन्होंने मेरी मौत मरुत पर लिख दी है
उन्होंने … उन्होंने… उन्होंने मेरी मौत जल पर भी लिख दी है

पढ़ें
प्रच्छन्न अनुच्छेद

प्रच्छन्न अनुच्छेद

लक्ष्मी-वाहन को लक्ष्मी के अतिरिक्त भी किसी अन्य लाभ की आकांक्षा हो सकती है यह जान कर शुक्राचार्य को आश्चर्य हुआ। उन्होंने उलूक से कहा,“हे पक्षिराज! उलूक-मंतव्य सामान्य जनों हेतु सदा स्पष्ट नहीं होते! आप अपना वांछित स्वयं कहें!”

पढ़ें
अर्थ की गति : श्रीधर जोशी

अर्थ की गति

शब्द यदि शिव है, तो अर्थ ही उसकी शक्ति है। निरर्थक शब्द अप्रयुक्त माने जाते हैं, साथ ही अर्थज्ञान से रहित को यास्क ने ठूँठ कहा है। यास्क कहते हैं,कि जैसै बिना ईंधन के अग्नि नहीं जल पाती है, उसी प्रकार अर्थज्ञान के विना शब्द प्रयोग व्यर्थ है

पढ़ें
वस्त्र गाथा और नारीवाद

वस्त्र गाथा

भाँति भाँति का फैशन क्या है और महिलाओं में वस्त्रों को लेकर प्रतिस्पर्धा कहाँ से आई? इस प्रश्न का एक शब्द में उत्तर है बाजारवाद। कुछ दिन पहले टहलते समय मेरी लगभग दस साल की बेटी ने प्रश्न किया कि क्या बड़े होने पर लड़कियों को छोटे कपडे नहीं पहनने चाहिए?

पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Post comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.