जब मैं नहीं रहूँगा (भूटान से) भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

जब मैं नहीं रहूँगा (भूटान)

क्यों कि जब मैं नहीं रहूँगा, और तुम वियोगसिक्त,
जब मैं हो रहूँगा तुम्हारी पहुँच से दूर बहुत
तुम्हारे अनसुने शब्द हो रहेंगे तिरोहित मात्र,
तुम्हारी ऊष्मा हो रहेगी यूँ ही शीतल
और बेड़ियों में बच रहेगा तुम्हारा स्व शोकार्त।

अत: जब हो सक्षम, मुझसे करो प्यार!!!

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अनाम प्रेमिका की अनाम (अफगानिस्तान से) भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

अनाम प्रेमिका की अनाम (अफगानिस्तान)

लिखा है मेरी देह पर, प्रीतम का नाम
धुल जायेगा, न करूँ स्नान

सब पहनेंगे स्वच्छ वस्त्र, कल उत्सव के दिन
पहनूँ मैं वे ही मैल कुचैल, प्रियतम के सब गन्ध

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परित्यक्त गाँव (नेपाल) भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

परित्यक्त गाँव (नेपाल)

दनुआर लोग
जो कभी फूँकते रहते थे प्राण
इन प्रस्थों के ऊपर,
ग्रस लिये गये
अधपके अरबी सपनों
और
नागर गुहा-मुखों द्वारा ।

जहाँ कभी पण्य और पंसार
के थे प्रसार ,
वहाँ बचे केवल अब
भूले स्वप्न
और
मृत पुरनियों के प्रेत।

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अर्थ की गति : श्रीधर जोशी

अर्थ की गति

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सीढ़ियाँ (बांग्लादेश से) भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

सीढ़ियाँ (बांग्लादेश)

हम सीढ़ियाँ हैं 

रौंदते हो जिन्हें
प्रतिदिन तुम
ऊँचे उठने को।

तब तुम
न रुकते कभी,
न देखते कभी मुड़।

तुम्हारे पाँव भी फिसलेंगे
एक दिन,
हमायूँ की भाँति।

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वस्त्र गाथा और नारीवाद

वस्त्र गाथा

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प्रच्छन्न अनुच्छेद

प्रच्छन्न अनुच्छेद

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