धर्मचक्रप्रवर्तन पूर्णिमा पर कुछ यूँ ही

धर्मचक्रप्रवर्तन पूर्णिमा : सहस्राब्दियों तक जिसकी अनुगूँज सम्पूर्ण विश्व में प्रतिध्वनित होनी थी, उसके श्रोता हाथ की अंगुलियों की संख्या इतने ही थे। समर्पण युक्त उत्सुकता का फलित होना भारतीय वाङ्मय की विशेषता है।

लघु दीप अँधेरों में tiny lamps – 8

लघु दीप अँधेरों में : जो उद्योग करने के समय उद्योग न करने वाला, युवा एवं बली हो कर भी आलस्य से युक्त होता है, जिसने उच्च आकांक्षाओं को छोड़ दिया है एवं जो दीर्घसूत्री है, वह आलसी प्रज्ञा के मार्ग को प्राप्त नहीं होता।

संक्रांति सतुआन बैसाखी से अपर प्रतिरूप Alter Ego तक

प्रत्येक वर्ष प्रतिपदा चै. शु. 1 युगादि नवसंवत्सर आता है, बैसाखी आती हैi देश में विविध नामों से नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। लोग यह प्रश्न भी पूछते हैं कि यह क्या चक्कर है? कुछ पञ्चाङ्ग व पण्डितों को कोसने भी लगते हैं। कोई चक्कर वक्कर नहीं है बल्कि अनेक नववर्ष भारत की प्राचीनता एवं रंग बिरंगे वैविध्य के प्रमाण हैं।

लघु दीप अँधेरों में tiny lamps in darkness – 7

आकाश में बृहस्पति एवं उसके समान पाँचेक अन्य भी हैं, किन्तु अपने विशेष पराक्रम में रुचि रखने वाला शिरमात्र शेष राहु उनसे वैर न करके परम तेजस्वी सूर्य एवं चन्‍द्र को ही ग्रसता है।

लघु दीप अँधेरों में tiny lamps in darkness – 6 , Six Sigma

लघु दीप अँधेरों में tiny lamps in darkness : इस कर्मभूमि में जन्म ले कर भी जो धर्माचरण नहीं करता, उसे वेदविद मुनीश्वर सबसे अधम श्रेणी का बताते हैं। यह भारतवर्ष सबसे उत्तम माना जाना चाहिये, सर्वकर्मफलप्रदाता जो देवों को भी दुर्लभ है।

दिक्काल, चिरञ्जीवी हनुमान, ⍍t➛0 एवं हम

दिक्काल : जो उद्योगी एवं लक्ष्य आराध्य समर्पित चिरञ्जीवी हनुमान हैं न, आज उनके जन्मदिवस पर उनसे ही सीख लें। ढूँढ़िये तो अन्य किन सभ्यताओं में दिक्काल को निज अस्तित्व से मापते चिरञ्जीवियों की अवधारणा है?

श्रीराम जन्मोत्सव रामनवमी (संस्कृत, तमिळ, अवधी हिन्‍दी, मराठी काव्य)

श्रीराम जन्मोत्सव रामनवमी : यह प्रस्तुति अव्यावसायिक है एवं इसका उद्देश्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जन्मोत्सव पर जनरञ्जन मात्र है। कृपया व्यावसायिक उद्देश्य या किसी भी प्रकार के आर्थिक, वस्तु लाभादि के लिये इसका प्रयोग न करें।