भाषा-संकट राष्ट्रभाषा व जीविका
एक बार पुनः भाषाओं को लेकर विवाद चल पड़ा है। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने पर कुछ क्षेत्रीय दलों, बुद्धिजीवियों द्वारा विरोध का क्रम चल पड़ा है। आने वाले २०-३० वर्षों में बहुत से कार्य जो अभी लोग बोल कर करते हैं, उन्हें कम्प्यूटर करने लगेंगे। ये कार्य सर्वप्रथम अंग्रेजी भाषा के ही होंगे इसमें भी कोई संशय नहीं है। बचे खुचे ऐसे कार्यों के लिए मूल अंग्रेजी भाषी को और अधिक प्राथमिकता मिलनी निश्चित ही है। तो हमारे लोग क्या बनेंगे? अंग्रेजी बोलने वाले वेटर?
Thick-Billed Flower Pecker फुलसुंघी
फुलसुंघी घने नम जंगलों, आम, महुआ, अमरुद आदि की वाटिकाओं में पाई जाती है। इसे वृक्षों की एक से दूसरी लघु शाखाओं पर फुदकते हुए देखा जा सकता है।
Maheshvara Sutra Shiva Sutra Panini पाणिनीय माहेश्वर सूत्र : सरल संस्कृत – ८
Maheshvara Sutra Shiva Sutra Panini पाणिनीय माहेश्वर सूत्र किसी सूत्र के एक वर्ण से आरम्भ हो आगे के किसी सूत्र के ‘इत्’ या ‘अनुबन्ध’ तक के बीच के समस्त वर्णों को संक्षिप्त रूप में दर्शाते हैं। स्पष्टत: इनमें ‘इत्’ वर्ण नहीं लिये जाते। इन्हें प्रत्याहार कहते हैं।
नीलगाय गाय नहीं, मृग है – घड़रोज
नीलगाय गाय नहीं। ब्रिटिश काल से पहले इसका नाम किसी स्रोत में नीलगाय मिले तो बताइये। कतिपय जन जङ्गली गाय भी कहने लगे हैं जो ठीक नहीं है।
सुपर्ण गरुड़ Suparṇa
सुपर्ण गरुड़। गरुड़ या सुपर्ण के अनेक रूप वेदों में वर्णित हैं। यह परब्रह्म का स्वरूप है जिसे अनेक अन्य नामों से भी कहते हैं।
