Five Trillion Economy पचास खरब की अर्थव्यवस्था

देश की परिभाषा बहुसंख्यक जनता के हितों से आती है। हम देश को मिस्र के अति सम्पन्न एवं शिल्प कौशल में समय के कीर्तिमान किन्तु मृत जन को संरक्षित रखते पिरामिडों के समान तो नहीं बनाना चाहते न?

पङ्क पड़ी परम्परा का आर्त्तनाद

भारत में अभियाननाद नहीं, आर्त्तनाद ही चल रहा है। भारतविद्या एवं भारत की उन्नति के इच्छुक गम्भीर युवाओं को इन सब प्रवृत्तियों से मुक्त हो कर्मसंलग्न होना होगा। हम मिथ्या गौरवबोध में जीने को आतुर हैं, वह हमारा अंग बन चुका है। पुरातन का अध्ययन, उनका वैज्ञानिक एवं सत्यनिष्ठ विश्लेषण तथा आक्रमणों के सटीक उत्तर, ये सब होने चाहिये किंतु उसके स्थान पर हो क्या रहा है?

lychee

Square Meal दो जून की रोटी, लीची एवं अकाल उगाता मनुष्य

Square Meal दो जून की रोटी – जनसंख्या का पेट भरने हेतु किये जा रहे अंधाधुंध दोहन एवं स्वार्थ के कारण हम अपना मृत्युगीत लिख रहे हैं।

vivekanand

जननिर्णय निर्भय बल विश्वास अनूप

इस बार का निर्णय ग्रामीण भारत का, गँवई भारत का भावुक निर्णय नहीं, मुक्त हो, सचैतन्य आगे बढ़ कर सशक्तीकरण की दिशा में लिया गया निर्णय रहा।

आँख में तीर – अजानन्निव किं वीर त्वमेनमनुवर्तसे

आँख में तीर – अजानन्निव किं वीर त्वमेनमनुवर्तसे … आप अनुवर्तन में ही क्यों लगे हैं? वह प्रहार किये जा रहा है, आप तो केवल प्रहार के निवारण में लगे हैं?

हम कभी दीर्घ ‘लाभ’ की नहीं सोचते

चार दिन का है खेला रे; को नृप होंहि हमहिं का हानी को जीते हम दीर्घ लाभ नहीं देखते। संसार के किसी भी वाङ्मय में ऐसा कुछ भी अनूठा नहीं है जो हमारे यहाँ नहीं।

जिहादी मुल्क एवं बनिया देश

चूँकि युद्ध एवं विनाश एक दूसरे के पर्याय हैं, कोई भी विकसित उत्पादक समाज युद्ध नहीं चाहता, जब कि लुटेरा सदैव चाहता है जिसकी युद्ध की अपनी परिभाषा होती है — संरक्षण हेतु नहीं, लूट हेतु। जिहाद उसी प्रकार का युद्ध है।