Zeigarnik effect अज्ञात अपूर्ण कार्य तनाव और बहती उर्जा

Zeigarnik effect अज्ञात, अपूर्ण-कार्य-तनाव और बहती ऊर्जा।

ज़ीगरनिक प्रभाव एक ऐसी स्थिति है जिसमें हमारा मस्तिष्क अपूर्ण कार्यों व घटनाओं को स्मरण करवाता रहता है। हमें बार-बार उन्हीं अपूर्ण घटनाओं व कार्यों पर अटकाता रहता है। Bluma Wulfovna Zeigarnik नमक एक रूसी महिला मनोविद ने उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में इस विषय पर शोध किया और उन्हीं के नाम पर इस मानसिक स्थिति का नाम पड़ा – ज़ीगरनिक प्रभाव।

धर्षण rape कोलाहल विद्या : सा विद्या या विमुक्तये

धर्षण rape कोलाहल विद्या : सा विद्या या विमुक्तये

धर्षण rape कोलाहल विद्या -कृत्रिम औचित्य के चक्कर में पुरुष अपने गुणों को ही गँवा देगा तो जो महती क्षति वह स्त्रियों को अधिक कुप्रभावित करेगी। किसी भी सभ्य समाज में जननी स्वरूपा स्त्री का सम्मान व सुरक्षा बड़े आदर्श होते हैं, हमारे यहाँ भी हैं और रहेंगे किंतु यह भी सच है कि उन्हें बनाये रखने हेतु मानसिक रूप से स्वस्थ, आत्मग्लानि या आत्मघाती वितृष्णा से मुक्त धर्मनिष्ठ साहसी पुरुष परम आवश्यक हैं, तब और जब कोई समाज चहुँओर आक्रमणों को झेल रहा हो।

Arthashastra Punishes Malfeasant Judges अर्थशास्त्र व कदाचारी न्यायाधीश

Arthashastra Punishes Malfeasant Judges अर्थशास्त्र व कदाचारी न्यायाधीश

न्याय का नाश करने की स्थिति में दण्डित करने के विधान बड़े स्पष्ट एवं सरल थे, दुरूह स्थिति नहीं थी। अर्थशास्त्र में कौटल्य (वा विष्णुगुप्त चाणक्य) ने न्यायालय को ‘धर्मस्थीय’ कहा है अर्थात वह स्थान जहाँ ‘धर्म में स्थित’ जन रहते हों। भारतीय सर्वोच्च न्यायालय का घोष वाक्य है – यतो धर्मस्ततो जय:। महाभारत से लिया गया यह अंश उद्योग पर्व में प्रयुक्त हुआ है।

मघा : भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

अमावस आकृतियाँ

आज अमावस्या के दिन सूर्य चंद्र के साथ मघा नक्षत्र पर विराजमान हैं। सिंह राशि में पड़ने वाले मघा नक्षत्र का प्रतीक है राजसिंहासन और इसके नाम के मूल मघ को समृद्धि, सम्पदा, ऐश्वर्य आदि से समझा जा सकता है। उससे पूर्व का अश्लेषा आलिङ्गन है।

आकाओं के कान नहीं, हमारे हाथ पाँव नहीं! प्रतिरोध हो भी तो कैसे?

आकाओं के कान नहीं, हमारे हाथ पाँव नहीं! प्रतिरोध हो भी तो कैसे?

निर्माण में समय लगता है, ध्वंस में नहीं। निर्माण में नहीं लगेंगे तो एक दिन ध्वस्त हो ही जायेंगे – यह सार्वकालिक व सार्वभौमिक सच है। हमें अपनी ‘सचाइयों’ में आमूल-चूल परिवर्तन करने ही होंगे, और कोई उपाय नहीं। ट्विटर या फेसबुक पर रुदाली गाना तो किसी भी दृष्टि से विकल्प नहीं, आकाओं के कान हैं ही नहीं!

धम्मदीक्षा दास हेतु नहीं – न भिक्खवे दासो पब्बाजेत्तब्बो

धम्मदीक्षा दास हेतु नहीं – विकृत एवं मिथ्या दृढ़कथन व मान्यतायें। वैश्विक स्तर पर राजनीतिक एवं स्वार्थी आग्रहों से बँधी अकादमिकी का यही सच है। 

A Soldier

चीनी वस्तुओं का बहिष्कार Boycott Chinese Goods कैसे करें?

इण्टरनेट है, गुगल खोज उपलब्ध है; जब आप एक योद्धा की भाँति स्थिरचित्त व दृढ़निश्चयी होंगे तो विकल्प ढूँढ़ ही लेंगे। इस कारण ही पहले मन का संस्कार आवश्यक है। चीनी मन आप से अधिक स्थिर, दृढ़ व सातत्ययुक्त है; उसकी विविध क्षेत्रों में प्रगति ही प्रमाण है। ‘हजार की यात्रा एक पग से’ को उन्होंने दशकों से अपना रखा है।

Crisis ahead आसन्न सङ्कट : मिथ्या-दृष्टि का ग्रहण करने से दुर्गति

Crisis ahead आसन्न सङ्कट : मिथ्या-दृष्टि का ग्रहण करने से दुर्गति

Crisis ahead आसन्न सङ्कट – भय न करने की बात में भय देखते हैं, भय करने की बात में भय नहीं देखते; मिथ्या-दृष्टि से दुर्गति को प्राप्त होते हैं।

बोलिये सुरीली बोलियाँ

बोलिये सुरीली बोलियाँ – भारत के पाँवों में शिलाओं के समान बँधे हुये भारी शब्दों पर विचार व मनन होने चाहिये एवं आवश्यकता पड़े तो उनका त्याग भी। हम सभी विनाश के सम्मोहन में पड़े हुये विकास, अभ्युदय, कल्याण आदि के प्रलाप करते हुये अनियंत्रित, अमर्यादित,अनियोजित लड़खड़ाते हुये चले जा रहे हैं। ऐसे में भारत तिल तिल मरता व मारा जाता रहेगा।

मृत्योर्माऽमृतङ्‍गमय

मृत्योर्माऽमृतङ्‍गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय : COVID-19 और भारत

मानवता के सामने आये कठिनतम समय का उजला पक्ष यह है कि मृत्योर्माऽमृतङ्‍गमय, और तमसो मा ज्योतिर्गमय के संदेश का देश आशामय है और संसार की सर्वाधिक गहन तथा दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या के बावजूद न केवल रोग को नियंत्रण में रखे हुए है बल्कि अपने देश के साथ-साथ पड़ोसी देशों के नागरिकों को भी आपदाग्रस्त देशों से सफलतापूर्वक बाहर निकालकर लाया है।

Delhi Jihad दिल्ली जिहाद और शनै: शनै: बढ़ता भावी विकराल संकट

दिल्ली जिहाद उदाहरण है कि कैसे इस्लाम येन केन प्रकारेण अपने लिये जमीन छीनता है। जिहादी हिंसा से ग्रस्त दिल्ली के उत्तरी पूर्वी भागों में से कुछ से महीनों या एकाध वर्षों में हिंदुओं का पलायन पूर्ण हो जायेगा जो कि टुकड़ा टुकड़ा कर दारुल इस्लाम पा लेने की दिशा में एक लघु किंतु बहुत ही प्रभावी इस्लामी उपलब्धि होगी।

Pakistan Zindabad Jihad पाकिस्तान जिंदाबाद और जिहाद पर कलन गणित

समझना हो तो संविधान व कुरान को साथ-साथ देखें। सत्य उद्घाटित होगा। आश्चर्य नहीं कि जहाँ आक्रांता कुरान को आगे रखते हैं, वहीं उनके आंदोलनकारी हरावल दस्ते संविधान को। इस तिलस्म को न तो समझा गया है और न ही इसकी तोड़ हेतु कुछ किया गया है या किया जा रहा है।

Lahore syndrome लाहौर लक्षण और ठौर ठौर कश्मीर

मात्र तीन दशक पूर्व स्वतंत्र भारत में, सरकारी तंत्र, संविधान, संसद आदि सब के रहते हुये भी जो हुआ तथा आगे जिस प्रकार से सारा तंत्र निस्सहाय दिखा, उससे हमें सीख मिल जानी चाहिये थी कि हम बहुत बड़े भ्रम में जी रहे हैं।

Inner Journey भीतरी यात्रा

ठीक है कि यह एक प्रक्रिया है, ऐसा नहीं हो सकता कि आप आज सोये एवं कल प्रात:काल सब कुछ यातु से परिवर्तित हो गया! परंतु क्या हमने यात्रा आरम्भ कर दी है? क्या हममें से प्रत्येक के पास कोई समयबद्ध कार्यक्रम है? क्या हम अपनी प्रगति से संतुष्ट हैं या ऐसा कुछ करने की सोच भी नहीं रहे? स्वयं से पूछें।

पतनोन्मुख भारतीय शिक्षातंत्र व भविष्य

‘हमें चाहिये आजादी’ केवल उत्साही नारा मात्र नहीं, वह भी नहीं जो इसके सिद्धांतकार बताते फेचकुर फेंक देते हैं; यह तीव्र गति से पसर रहे एक घातक रोग का लक्षण है। इस रोग में उत्तरदायित्व का कोई स्थान नहीं, कर्तव्य पिछड़ी सोच है तथा बिना किसी आत्ममंथन के कि हम इस देश से जो इतना ले रहे हैं, कुछ दे भी रहे हैं क्या? केवल अधिकार भाव है, अतिक्रांत सी स्थिति।

CAA व भ्रष्ट जिहादी युवा

सांस्कृतिक व मानवीय दृष्टि से भी ऐतिहासिक (CAA नागरिकता संशोधन अधिनियम) विधिक प्रावधान को मुस्लिम विरोधी बना कर प्रस्तुत किया गया। उसकी आड़ में ‘direct action’ और जिहाद का पूर्वाभ्यास किया गया।

Stop this fire यह आग रुकनी चाहिये।

हमारा समय ‘अवमुक्त’ समय है। अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता के नाम पर, व्यक्ति की स्वतन्त्रता के नाम पर सामाजिक एवं धार्मिक निषेध बहुत तनु होते गये हैं। कहीं न कहीं हम अधिक स्वकेन्द्रित होते जा रहे हैं।