माघ पूर्णिमाङ्क, 2073 वि.,[वर्ष-1, अङ्क-2] शुक्रवार

जनसंख्या वृद्धि और चतुर ताँत या अभिज्ञ तंतु

जनसंख्या वृद्धि की दर को थामना ही होगा। हमार कहनाम यो यज्ञो विष्वतस्तन्तुभिस्तत एकशतं देवकर्मेभिरायतः। इमे वयन्ति पितरो य आययुः प्र वयाप वयेत्यासते तते॥ पुमाँ एनं तनुत उत् कृणत्ति पुमान् वि तत्ने अधि नाके अस्मिन्। इमे मयूखा उप सेदुरू सदः सामानि चक्रुः तसराण्योतवे॥ (ऋग्वेद, 10.130.1-2) पितर बुनकर हुये हैं, सूत ...
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व्यस्क पक्षी

अवधी चिरइयाँ : जलमखानी (Metopidius indicus)

वैज्ञानिक नाम: Metopidius indicus स्थानीय नाम: जलमखानी, जलपिपी, दालपिपी, टीभु, कांस्य पक्ष, जल कपोत, कटोई अंग्रेजी नाम: Bronse  Winged Jacana चित्र स्थान और दिनाङ्क: अयोध्या, उत्तरप्रदेश, 13/01/2017 छाया चित्रकार (Photographer): आजाद सिंह यह एक छोटी चिड़िया है जो कमल तथा पानी के अन्य पौधों पर टहलती रहती है। इसके पंजे ...
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शून्य – 2

शून्य - 1 से आगे ... अंक हर सभ्यता में किसी न किसी रूप में रहे हैं। अंको की कल्पना एकैक फलन के रूप में वस्तुओं की गणना के लिये हुई, जो सम्भवतः पशुओं की गणना रही होगी। जितने पशु उतने कंकड़ रख लेने की परंपरा से शुरुआत हुई होगी। ...
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एञ्जिओ देवि (संस्कृत हास्य)

एञ्जिओ देवि सा बाला ! भवान् जानासि वा ? सा का इति भवान् जानासि वा? सा जानुपर्यन्तं शुद्ध चर्म पादत्राणं धारयति। एषा बाला मुण्डोपरि रे-बेन उपनेत्रं धारयति सर्वदा। विचित्रवर्ण ओष्ठरागः, कज्जलिका, पिष्टि समेता सर्व रूपसज्जायुक्ता सा बाला भवान् न जानासि? वाण्याः आङ्ग्लभाषायां वादिन् एषा बाला तीव्र वेगेन कटु अपशब्दमपि वक्तुं ...
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ईशावास्योपनिषद (ईशोपनिषद)

ईशावास्योपनिषद शुक्ल यजुर्वेद का अंतिम, चालीसवाँ अध्याय है। उप, नि, सद्, इन तीन शब्दों की सन्धि से बने उपनिषद का शाब्दिक अर्थ है निकट बैठना जो गुरुकुल परम्परा का द्योतक भी है और गुरु शिष्य के बीच ज्ञान की गंगा का वाहक भी। उपनिषद् में गुरु और शिष्य के बीच ...
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आया बसन्त, अब मत सो

आया बसन्त , जागो प्यारे! जाड़े का शैथिल्य छोड़ो। सुनो! पूर्णिमा नक्षत्र के बहाने कोई बसन्त की प्रस्तावना पढ़ रहा है! हिमाद्रेः संभूता सुललित करैः पल्लवयुता सुपुष्पामुक्ताभिः भ्रमरकलिता चालकभरैः कृतस्थाणुस्थाना कुचफलनता सूक्ति सरसा रुजां हन्त्री गंत्री विलसति चिदानन्द लतिका। ~आचार्य शङ्कर  अभी नयनोन्मीलन नहीं हुआ है। मैं निद्रालस ही पड़ा ...
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पूर्ववर्ती, माघ अमावस्याङ्क, 2073 वि., [वर्ष 1, अङ्क 2], शुक्रवार, ‘प्रथम’ अङ्क

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