Tiny lamps लघु दीप – 12

काल राजा का कारण है अथवा राजा काल का? ऐसा संशय तुम्हें नहीं होना चाहिये। यह निश्चित है कि राजा ही काल का कारण होता है। जिस समय राजा दण्डनीति का सम्यक एवं पूर्ण प्रयोग करता है, उस समय (राजा से प्रभावित) काल कृतयुग की सृष्टि करता है। 

ultra-sociality reciprocity अतिसामाजिकता पारस्परिकता : सनातन बोध – 30

हमारा वर्तमान हमारे भूतकाल के विचारों से निर्मित होता है। हमारे वर्तमान के विचार हमारे भविष्य का निर्माण करते हैं। हमारा जीवन एक मानसिक सृष्टि है। – बुद्ध

आदिकाव्य रामायण से – 32, सुन्‍दरकाण्ड [हनूमन्तं च मां विद्धि तयोर्दूतमिहागतम्]

मारुति का श्रीराम के गुह्य अङ्गों का अभिजान देवी सीता के मन में विश्वास दृढ़ करने में सहायक हुआ कि यह अवश्य ही उन्हीं का दूत है, कोई मायावी बहुरूपिया राक्षस नहीं। आगे हनुमान स्वयं कहते भी हैं – विश्वासार्थं तु वैदेहि भर्तुरुक्ता मया गुणा:। आदि कवि भी पुष्टि करते हैं – एवं विश्वासिता सीता हेतुभि: शोककर्शिता, उपपन्नैरभिज्ञानैर्दूतं तमवगच्छति। 

आदिकाव्य रामायण से – 31, सुन्‍दरकाण्ड [कीदृशं तस्य संस्थानं रूपं रामस्य कीदृशम्]

आदिकाव्य रामायण : उपस्थिति सुहावन थी किन्‍तु जनस्थान की स्मृति भी थी। वानर सौम्य है, मन विश्वास करने को कहता था। अविश्वास भी, कहीं मैं सपना तो नहीं देख रही?

पुराण एवं इतिहास बोध

पुराण एवं इतिहास बोध : अपनी श्रद्धा, मान्यतायें, आग्रह, अहङ्कार, ममत्व; सब किनारे रख पढ़ें। आप नारद हो जाते हैं, जिससे कि कुछ नहीं छिपा। एक एक शब्द, एक एक घटना आप को अनंत से जोड़ने लगती है। जो अशुभ होगा, अवांछित लगेगा; वह भी वहाँ सोद्देश्य है। कहा भी गया है कि सित एवं असित दोनों से संसार है, उनसे ही पुराण हैं।

Procrastination टालमटोल, दीर्घसूत्रता, आलस्य, प्रमाद; सनातन बोध – 28

Procrastination टालमटोल – विद्यार्थीं कुतो सुखः? – विद्यार्थियों का सन्दर्भ है तो इस शोधपत्र को विश्वविद्यालय में न्यूनतम उपस्थिति की अनिवार्यता के विरोध में प्रदर्शन एवं दीर्घ काल तक विश्वद्यालय में ही पड़े रहने के समाचारों से जोड़कर देखें तो?