मघा : भाद्रपद अमावस्या साहित्य संयुक्ताङ्क, २०७७ वि., वर्ष-५, अङ्क-८९, बुधवार

अमावस आकृतियाँ

आज अमावस्या के दिन सूर्य चंद्र के साथ मघा नक्षत्र पर विराजमान हैं। सिंह राशि में पड़ने वाले मघा नक्षत्र का प्रतीक है राजसिंहासन और इसके नाम के मूल मघ को समृद्धि, सम्पदा, ऐश्वर्य आदि से समझा जा सकता है। उससे पूर्व का अश्लेषा आलिङ्गन है।

कुम्भ, कामकुम्भ, स्तन, मंदिर विमान, शिखर, शिखरदशना, गुम्बद

कुम्भ, कामकुम्भ, स्तन, मंदिर विमान, शिखर, शिखरदशना, गुम्बद

आप के यहाँ गुम्बद कभी नहीं था, कलश कुम्भ के वास्तु आयाम अनेक थे, इस बात का ध्यान रखते हुये शिखर हेतु शिखर शब्द ही प्रयोग में लायें, इससे आप दक्षिण से भी जुड़ जाते हैं।

आकाओं के कान नहीं, हमारे हाथ पाँव नहीं! प्रतिरोध हो भी तो कैसे?

आकाओं के कान नहीं, हमारे हाथ पाँव नहीं! प्रतिरोध हो भी तो कैसे?

निर्माण में समय लगता है, ध्वंस में नहीं। निर्माण में नहीं लगेंगे तो एक दिन ध्वस्त हो ही जायेंगे – यह सार्वकालिक व सार्वभौमिक सच है। हमें अपनी ‘सचाइयों’ में आमूल-चूल परिवर्तन करने ही होंगे, और कोई उपाय नहीं। ट्विटर या फेसबुक पर रुदाली गाना तो किसी भी दृष्टि से विकल्प नहीं, आकाओं के कान हैं ही नहीं!

CoViD-19 और भारतीय मीडिया (टी वी) : कर्तव्य पालन या केवल छिछोरई?

CoViD-19 और भारतीय मीडिया (टी वी) : कर्तव्य पालन या केवल छिछोरई?

CoViD-19 और भारतीय मीडिया – मनोरोगी व क्षुद्र अनियंत्रित नागरिकों से भरी इकाई नहीं, सुव्यवस्थित समूह जो निज-हित की प्राथमिकताओं से बद्ध हो।

बोलिये सुरीली बोलियाँ

बोलिये सुरीली बोलियाँ – भारत के पाँवों में शिलाओं के समान बँधे हुये भारी शब्दों पर विचार व मनन होने चाहिये एवं आवश्यकता पड़े तो उनका त्याग भी। हम सभी विनाश के सम्मोहन में पड़े हुये विकास, अभ्युदय, कल्याण आदि के प्रलाप करते हुये अनियंत्रित, अमर्यादित,अनियोजित लड़खड़ाते हुये चले जा रहे हैं। ऐसे में भारत तिल तिल मरता व मारा जाता रहेगा।

मृत्योर्माऽमृतङ्‍गमय

मृत्योर्माऽमृतङ्‍गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय : COVID-19 और भारत

मानवता के सामने आये कठिनतम समय का उजला पक्ष यह है कि मृत्योर्माऽमृतङ्‍गमय, और तमसो मा ज्योतिर्गमय के संदेश का देश आशामय है और संसार की सर्वाधिक गहन तथा दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या के बावजूद न केवल रोग को नियंत्रण में रखे हुए है बल्कि अपने देश के साथ-साथ पड़ोसी देशों के नागरिकों को भी आपदाग्रस्त देशों से सफलतापूर्वक बाहर निकालकर लाया है।

जिहादी मुल्क एवं बनिया देश

चूँकि युद्ध एवं विनाश एक दूसरे के पर्याय हैं, कोई भी विकसित उत्पादक समाज युद्ध नहीं चाहता, जब कि लुटेरा सदैव चाहता है जिसकी युद्ध की अपनी परिभाषा होती है — संरक्षण हेतु नहीं, लूट हेतु। जिहाद उसी प्रकार का युद्ध है।

तप नहीं तो कुछ भी नहीं

बहुत दिनों तक प्रगति का नेतृत्त्व पश्चिम ने किया, अब पुरातन एशियाई जगत भी आगे निकलने को अँगड़ाइयाँ लेने लगा है। प्रश्न यह है कि हम उनमें कौन हैं, कहाँ हैं, क्या कुछ अनूठा कर रहे हैं? जब मैं अनूठा कह रहा हूँ तो किसी बड़े प्रकल्प की बात नहीं कर रहा। मैं एक व्यक्ति के रूप में, परिवार के रूप में, संस्था के रूप में नवोन्मेष की बात कर रहा हूँ, साथ ही उस अनुशासन की भी जो कि न्यूनतम आवश्यकता है। देश बड़े तभी होते हैं जब उनके नागरिक बड़े होते हैं।

INDIAN ROLER/INDIAN BLUE JAY नीलकण्ठ, चित्र सर्वाधिकार: आजाद सिंह, © Ajad Singh, सरयू नदी के पास, माझा, अयोध्या, फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, May 21, 2017

नीलकण्ठ Indian Roller / Indian Blue Jay

नीलकण्ठ  Indian Roller / Indian Blue Jay आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओडिसा तथा कर्नाटक का राजकीय पक्षी है। यह एक मैदानी पक्षी है। यह श्येन  (बाज ) के स्वर की अनुकृति कर सकता है। INDIAN ROLER/INDIAN BLUE JAY नीलकण्ठ, चित्र सर्वाधिकार: आजाद सिंह, © Ajad Singh, सरयू नदी के पास, माझा, अयोध्या, फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, 21 मई,…

जय भारत

‘भारत’ शब्द के तमिळ रूप का स्वीकार ध्यान देने योग्य है। तोड़ने वाली शक्तियाँ चाहे जितनी भी सक्रिय रही हों, ऐक्य का पक्ष रह ही जाता है। हमें उस पर ही केन्द्रित होना होगा।

Joshua Project जोशुआ ‘परमेश्वर यादवों से प्रेम करता है’

Joshua Project : ‘जोशुआ प्रोजेक्ट’ ‘फ्रण्टियर वेंचर्स’ की एक मिनिस्ट्री है जिसने इसाइयत के प्रसार के लिये ‘10/40 खिड़की’ पर स्वयं को केन्द्रित रखा है। भूगोल अक्षांश 10 अंश से ले कर 40 अंश तक (और उनसे लगे हुये) विराट भू भाग को यह नाम दिया गया है जिसमें विश्व की हिन्दू, बौद्ध और मुसलिम जनसंख्या का बहुसंख्य निवास करता है।

आनन्द, स्त्री आ गई, अब सद्धर्म केवल 500 वर्ष ही रह पायेगा!

एक बार भगवान बुद्ध शाक्यों के बीच कपिलवस्तु के निग्रोध विहार में बैठे थे। उनके पास महापजापति गोतमी आईं और सम्मानपूर्वक दूरी रखते हुये हुये उन्हों ने बुद्ध के सामने प्रस्ताव रखा – भंते! अच्छा हो कि मातृशक्ति स्त्रियाँ (मातुगामो) भी गृहत्याग कर प्रवज्या ले आप के बताये धम्म और विनय के मार्ग पर चलें।  बुद्ध ने…

कन्यादान

मेरे पास आपकी कोई भी धरोहर है, और मैं उसे आपको वापस कर दूँ तो वह क्या कहलायेगा ? नहीं, नहीं,ईमानदारी या नेकनीयती या कर्तव्य के रूप में न बताना आपके पास उस अमानत के पहुँचने के भाव को आप किस शब्द द्वारा व्यक्त करेंगे, यह बताना। अब आप कहेंगे अजीब खब्ती है! सीधे सीधे…

मनु स्मृति में यात्रा – 4 (वृषली फेन और नि:श्वास)

भाग 1, 2 और 3 से आगे:  __________________________________________ निवेदन है कि इस लेखमाला को पहले भाग से क्रमानुसार ही पढ़ा जाय।  __________________________________________ मनु स्त्री के लिये गुरु के आश्रम में रह कर शिक्षा प्राप्त करने की कोई व्यवस्था नहीं सुझाते हैं। शिक्षा समाप्ति के पश्चात समावर्तन (घर वापसी), भार्या चयन और तत्पश्चात दारकर्म (विवाह उपरांत…

मनु स्मृति में यात्रा – 3 (शूद्र जुगुप्सित)

पहला भाग, दूसरा भाग     … अब आगे ______________________________________ शूद्रों के प्रति पहला कथित निन्दनीय भाव मनुस्मृति के दूसरे अध्याय के 31 वें श्लोक में मिलता है। प्रकरण विभिन्न वर्ण-जातकों के नामकरण से सम्बन्धित है। सातत्य और नैरंतर्य पर विचार के लिये क्र. 30 से 33 तक के श्लोक यहाँ दर्शाये गये हैं। पहले ऋग्वेद की एक…

ज.ने.वि. का अंत:पुर – 1

JNU ज.ने.वि. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुल 14 संस्थान हैं जिन्हें School कहा जाता है। इन संस्थानों के भीतर एकाधिक केन्द्र हैं। प्रारम्भ करते हैं ‘भारतीय भाषा केन्द्र’ से। इस केन्द्र की निम्न विशेषतायें हैं: (1) इस केन्द्र में कुल छ: आचार्य हैं।   (2) 2010-11 से 2014-15 के बीच पाँच वर्षों में यहाँ के…

Manu Smriti मनुस्मृति (मनु संहिता) में यात्रा – 2: थोड़ा सा इतिहास

भाग -1 से आगे… जेठ आषाढ़ का सन्धिकाल है। नीम की छाँव में रह रह आती प्रिय पवन को दुपहर की तपन से मिला कर उसे पीता सा एक युवक स्तब्ध आकाश निहार रहा है। उसके कानों में अभी अभी पढ़ी गयी पुस्तक के अश्वों के टाप की गूँज है और सामने चमकती कठभठ्ठा भूमा…

रामजन्म, सहस्रो वर्ष और चार कवि

श्रीराम जन्म का वर्णन वाल्मीकि से प्रारम्भ हो मराठी भावगीत तक आते आते आह्लाद और भक्ति से पूरित होता चला गया है। भगवान वाल्मीकि बालकाण्ड में संयत संस्कृत वर्णन करते हैं: कौसल्या शुशुभे तेन पुत्रेण अमित तेजसा ।  यथा वरेण देवानाम् अदितिः वज्र पाणिना ॥ १-१८-१२ जगुः कलम् च गंधर्वा ननृतुः च अप्सरो गणाः ।…