Crisis ahead आसन्न सङ्कट : मिथ्या-दृष्टि का ग्रहण करने से दुर्गति
Crisis ahead आसन्न सङ्कट – भय न करने की बात में भय देखते हैं, भय करने की बात में भय नहीं देखते; मिथ्या-दृष्टि से दुर्गति को प्राप्त होते हैं।
Crisis ahead आसन्न सङ्कट – भय न करने की बात में भय देखते हैं, भय करने की बात में भय नहीं देखते; मिथ्या-दृष्टि से दुर्गति को प्राप्त होते हैं।
यद्यपि भारतीय गणना-पद्धति प्रारम्भ से ही दाशमिक प्रणाली आधारित रही है तथापि भारतीय गणना-कर्म में षोडश पद्धति का भी बहुत प्रचलन रहा है। षोडश पद्धति अर्थात् सोलह को आधार (base) मान कर की जाने वाली गणना। प्राचीन भारत में शास्त्रीय गणित भले दस के गुणक में चले, व्यवहार गणित तो चार, आठ, सोलह, बत्तीस की शैली में ही चला करता था जो परम्परा अभी भी पूर्णतः समाप्त नहीं हुई है।
Common Woodshrike खरकटा लहटोरा का अधिकांश समय वृक्षों पर ही व्यतीत होता है। घास-फूस के झुरमुटों में रहने के कारण इसे खरकटा लहटोरा कहा जाता है।
दिष्ट्या दृष्टा त्वया देवी रामपत्नी यशस्विनी॥ दिष्ट्या त्यक्ष्यति काकुत्स्थश्शोकं सीतावियोगजम्। यह सौभाग्य की बात है कि तुम श्रीराम की पत्नी यशस्विनी देवी सीता के दर्शन कर आये, अब देवी सीता के वियोग से उपजा काकुत्स्थ राम का शोक दूर हो जायेगा, यह भी सौभाग्य की बात है।
गौतम बुद्ध के अंतिम शिष्य सुभद्द थे। उन्हें दीक्षित करने के पश्चात महापरिनिर्वाणशय्या पर बुद्ध ने बिना पूछे ही आनन्द को तथागत के पश्चात संघ की दिशा क्या हो इसके बारे में बताना आरम्भ किया। इसे पच्छिमवाचा, अंतिम वाणी कहा जाता है।
भावात्मक बुद्धि के उदाहरण सरल हैं -दूसरों की अवस्था समझना और यह समझना कि दूसरे जो कर रहे हैं, वैसा क्यों कर रहे हैं। और कोई भी क्षणिक प्रतिक्रिया देने से पहले वस्तुस्थिति को समझना। हमारे स्वयं की भावनाओं (संवेगों) को समझने तथा नियंत्रित करने की योग्यता के साथ साथ दूसरों की भावनाओं एवं संवेगों को समझना और उन्हें सम्मान देना भी महत्वपूर्ण हैं जिससे निर्णय लेते समय हम उनसे प्रभावित न हों ।
Nīti-Sāraḥ नीतिसार : Tiny Lamps लघु दीप – 26 विद्वानेव विजानति विद्वज्जनपरिश्रमम् ।न हि वन्ध्या विजानाति गुर्वीं प्रसववेदनाम् ॥
CoViD-19 और भारतीय मीडिया – मनोरोगी व क्षुद्र अनियंत्रित नागरिकों से भरी इकाई नहीं, सुव्यवस्थित समूह जो निज-हित की प्राथमिकताओं से बद्ध हो।
गूगल सर्च इंजन लेख के शीर्षक, यूआरएल, प्रथम पैरा के वाक्य लेख के कीवर्ड आदि से लेख के विषय को तौलने का प्रयास करता है। इसी से निश्चित करता है कि कौन से लेख किस विषय से सम्बंधित हैं और कितने अधिक सम्बंधित हैं जिन्हें किसी और के द्वारा ढूंढें जाने पर परिणाम में दिखाना है और किस क्रम में दिखाना है।
हनुमान सागर को एक विशाल जलपोत की भाँति पार कर रहे हैं। आकाश, क्षितिज और सागर मिल कर कैसा दृश्य उपस्थित कर रहे हैं!
सूर्य और चन्द्र दोनों दिख रहे हैं।
सहेली लगभग ६ इंच का छोटा सा सुन्दर पक्षी है जो युगल में या लघु झुण्ड में पेड़ों के ऊपर फुदकते हुए देखा जा सकता है। इसकी चोंच और पंजे कृष्ण वर्णीय तथा नेत्र गोलक भूरा होता है।
Hindu Time Reckoning हिन्दू कालगणना, ग्रहों को अहोरात्र की होराओं का स्वामित्व नहीं सौंपा गया था। कालनिर्धारण की सबसे सटीक काल-यंत्र पृथ्वी ।
बोलिये सुरीली बोलियाँ – भारत के पाँवों में शिलाओं के समान बँधे हुये भारी शब्दों पर विचार व मनन होने चाहिये एवं आवश्यकता पड़े तो उनका त्याग भी। हम सभी विनाश के सम्मोहन में पड़े हुये विकास, अभ्युदय, कल्याण आदि के प्रलाप करते हुये अनियंत्रित, अमर्यादित,अनियोजित लड़खड़ाते हुये चले जा रहे हैं। ऐसे में भारत तिल तिल मरता व मारा जाता रहेगा।
Consciousness चैतन्य व योगवासिष्ठ समुद्र-तरंग, सर्प-रस्सी, घट-आकाश, यन्त्र पुतली, अनेक स्वाँग धरने वाला नटुआ, वर्षाकाल का एक ही मेघ नानारूप। वस्तुओं और घटनाओं का स्वरूप मस्तिष्क द्वारा निर्मित होता है। इसका अर्थ यह नहीं कि वे वस्तुयें हैं नहीं परंतु यह है कि वे हमारे मस्तिष्क के लिए उस आभासी रूपों में हैं जिनमें उन्हें वह देखना चाहता है।
The Classical Hindu Law, in its various branches is probably the most detailed system of law to be discovered. Conception of legal liability is perspicuous.
देयोरा भारत की बारहमासी चिड़िया है। ऊसर बाघेरी अपने नाम के अनुरूप खुले मैदानों और ऊसर क्षेत्र में रहने वाली चिड़िया है, इसे जंगल किञ्चित भी प्रिय नहीं है।
भोजन का सनातन दर्शन। क्या अन्य कार्य करते हुए भोजन करने से कोई हानि-लाभ जुड़ा है। आज के व्यस्त जीवन में भागते हुए भोजन करने पर आज का मनोविज्ञान क्या कहता है।
Valmikiya Ramayan अत्याचारी स्वामी के सेवक उसकी मानसिक दुर्बलताओं एवं आशंकाओं का प्रयोग उसे मतिभ्रमित कर समस्या से ध्यान हटा स्वयं को बचाने हेतु करते हैं।
आँख में तीर – अजानन्निव किं वीर त्वमेनमनुवर्तसे … आप अनुवर्तन में ही क्यों लगे हैं? वह प्रहार किये जा रहा है, आप तो केवल प्रहार के निवारण में लगे हैं?
Maximiser Vs Satisficer, मनोवैज्ञानकों ने निर्णय लेने के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण दो सरल रूपों में किया है – एक वे जो प्रत्येक निर्णय को इस प्रकार लेने का प्रयत्न करते हैं जिससे उन्हें अधिकतम लाभ मिले (maximiser), इन व्यक्तियों को अपने निर्णयों के पूर्णत: दोषमुक्त (perfect) होने चिंता बनी रहती है। और दूसरे वे जो अपने निर्णयों से प्रायः संतुष्ट होते हैं।