Dynamo, आर्यावर्त एवं भारत

हिन्दी क्षेत्र की असफलता उस चुम्बक-युक्ति में गति के अभाव से समझी जा सकती है जिसमें बल था, क्षमता थी किंतु नहीं थी तो सार्थक गति नहीं थी। आर्यावर्त का Dynamo मात्र पङ्गु ही नहीं है, वरन चलने की उसमें इच्छा ही नहीं है !

Intermittent Fasting उपवास एवं व्रत : सनातन बोध – 43

जैसे जैसे आधुनिक शोध आते जायेंगे, अनुभव एवं प्रेक्षण आधारित सनातन प्रज्ञा के निष्कर्ष सूत्र पुष्ट होते जायेंगे। मानवता एक प्रकार से स्वयं के पुनर्नुसन्‍धान में लगी है एवं भारत उसके मार्ग में सहस्रदीप जलाये हुये है।

Metonic Cycle Vedang Jyotish! No!! : मृग ढूँढ़े वन माँहिं !

Metonic Cycle Vedang Jyotish आर्य शैली या तो दस के गुणक की है या आठ की! उन्नीस की संख्या न तो हमारी दाशमिक प्रणाली से समर्थित है न अष्टक प्रणाली से!

Greylag Goose कलहंस, चित्र सर्वाधिकार: आजाद सिंह, © Ajad Singh, समदा झील, सोहावल, अयोध्या, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश, January 19, 2019 & January 20, 2019

Greylag Goose कलहंस

धूसर (grey) एवं श्याव (भूरा), ये दो रंग भारत में इस पक्षी के हंस से भिन्न अभिज्ञान हेतु प्रयुक्त होते रहे। हंस संस्कृत एवं भारतीय साहित्य तथा आख्यानों, पुराणों, कथाओं आदि में इस देश के मानस में गुम्फित रहा है।

Babylonian and Indian Astronomy बेबिलॉन एवं भारतीय ज्योतिष – 1

वे सभी विचार मिथ्या सिद्ध हो जाते हैं जो कहते हैं कि भारतीय ज्योतिष मेसोपोटामिया या ग्रीस से भारत में प्रसारित हुई किसी धारा पर आधारित है। ज्योतिष के प्रसिद्ध विद्वान बी एल वान देर वैरडेन ने 1980 के एक पत्र Two treatises on Indian astronomy में इस विवाद पर अपने विचार प्रस्तुत किए ।

सरल यांत्रिकता की विशेषज्ञों से श्रेष्ठता : सनातन बोध – 20

सनातन बोध : केवल सबसे महत्त्वपूर्ण कारकों को लेकर यदि हम एक साधारण प्रतिरूप बना लें तो साधारण सूत्रों से कई जटिल प्रश्नों के उत्तर सरलता से दिये जा सकते हैं, तथाकथित विशेषज्ञों के अनुमान से अधिक अचूक। मनोविज्ञान का इन अबूझ प्रश्नों के लिए गणित की ओर मुड़ना भी कोई आश्चर्य नहीं!

Valmikiya Ramayan प्रमदावन विध्वंसक हनुमान

आदिकाव्य रामायण से – 23 : सुन्‍दरकाण्ड, [गमनं वा परस्त्रीणां हरणं – रावण का धर्म]

सुन्‍दरकाण्ड : पत्तों के झुरमुट में पुष्पों से ढक से गये हनुमान ने उसे पहचानने का प्रयत्न किया। विचित्र वस्त्राभरणों को धारण किये हुये रावण के कान ऐसे थे जैसे कि खूँटे गाड़ रखे हों! – क्षीबो विचित्राभरणः शङ्कुकर्णो। यह निश्चय कर कि यही रावण है, मारुति जहाँ बैठे थे, वहाँ से कुछ नीचे उतर आये ताकि ठीक से देख सकें।